बुधवार को लोकसभा में पेश होने वाले वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सभी राजनीतिक दलों से कड़ा विरोध जताने की अपील की है। बोर्ड ने एक पत्र जारी करते हुए कहा है कि भाजपा के सहयोगी दलों और सांसदों सहित सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध करें और इसके पक्ष में किसी भी परिस्थिति में मतदान न करें।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने एक पोस्ट में कहा कि यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के खिलाफ है, और यह भेदभाव और अन्याय पर आधारित है। उनका आरोप है कि भाजपा इस विधेयक के माध्यम से वक्फ कानून को कमजोर करने और वक्फ संपत्तियों को हड़पने का रास्ता साफ करना चाहती है।
रहमानी ने कहा कि यदि यह संशोधन पारित हो गया, तो वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी अवैध दावों की बाढ़ आ जाएगी और कलेक्टर तथा डीएम के माध्यम से इन संपत्तियों को हड़पना आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विधेयक में वक्फ बाई यूजर की समाप्ति, लिमिटेशन एक्ट से छूट को खत्म करने, वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने जैसे प्रावधान हैं, जो वक्फ संपत्तियों को मिलने वाले संरक्षण को समाप्त कर देंगे।
बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि इस संशोधन के द्वारा केंद्र और राज्य सरकार, नगर निगम और अर्ध-स्वायत्त संस्थाओं को वक्फ संपत्तियों पर सरकारी दावे करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वक्फ ट्रिब्यूनल की शक्तियां कम हो जाएंगी और सरकार के अवैध कब्जे को वैध बनाने का रास्ता खुल जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य धर्मों की वक्फ संपत्तियों को समान संरक्षण मिलता है, इसलिए केवल मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को निशाना बनाना भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। मौलाना रहमानी ने अंत में कहा कि भारत हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और आपसी सम्मान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन अब देश की बागडोर ऐसे तत्वों के हाथ में है, जो इस सौहार्द को खत्म कर देश में अराजकता और अशांति फैलाना चाहते हैं।



