केजरीवाल को ऐसे नहीं मिली जमानत…अभिषेक मनु सिंघवी की दमदार दलीलों ने खोला तिहाड़ का दरवाजा

शराब घोटाले मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को जेल से जमानत मिल गई है। जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ ने जमानत का फैसला सुनाया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को सही बताया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में बंद रखना न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

सर्वोच्च न्यायालय में सीएम केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी केस लड़ रहे थे। सीएम केजरीवाल को शराब घोटाले मामले में रिहाई दिलाने के लिए अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के सामने महत्वपूर्ण दलीलें दी।

अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर एक नजर

  • सीबीआई की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए रिहाई और जमानत देने की मांग की।
  • सीआरपीसी की धारा 41 ए में पूछताछ का नोटिस भेजे बिना सीधे गिरफ्तार करना गैरकानूनी है।
  • सुप्रीम कोर्ट अपने कई फैसलों में कह चुका है कि जमानत नियम और जेल अपवाद है।
  • केजरीवाल संवैधानिक पद पर हैं जमानत मिलने के बाद उनके भागने की संभावना नहीं है।
  • सीबीआई ने जिन आधारों पर गिरफ्तारी की, वो जनवरी के थे। लेकिन 25 जून को गिरफ्तार किया गया।
  • गिरफ्तारी का एक मात्र आधार यह है कि जांच में केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे है और जवाब देने में टाल मटोल कर रहे हैं।
  • एफआईआर के 8 महीने बाद केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
  • पीएमएलए के तहत दोहरी शर्तो का प्रावधान है। इन सख्त नियमों के बावजूद हमारे पक्ष में दो फैसले हुए हैं।

सीबीआई ने बचाव में क्या कहा था?

  • केजरीवाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।
  • सीबाआइ को जांच और गिरफ्तारी का अधिकार है।
  • केजरीवाल की जमानत याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए सीबीआई ने कहा कि उन्हें जमानत के लिए पहले सत्र अदालत जाना चाहिए था वह सीधे हाई कोर्ट गए जो कि ठीक नहीं हैं।
  • केजरीवाल की गिरफ्तारी कोर्ट से इजाजत लेने के बाद की गई थी।
  • केजरीवाल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है जो याचिका के साथ नहीं लगाया है।
  • आरोपपत्र से पता चलता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है कि नहीं।
  • आरोपपत्र के बगैर ये नियमित जमानत नहीं मांग सकते।
  • सीबीआइ ने यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी तो हाई कोर्ट हतोत्साहित होगा क्योंकि हाई कोर्ट ने मेरिट पर नहीं सुना था।
  • जमानत के लिए निचली अदालत जाने को कहा था।
  • पीठ ने हाई कोर्ट के देरी से आदेश देने पर भी सवाल उठाया और कहा कि जब मामला निचली अदालत को भेजना था तो यह आदेश हाई कोर्ट को जल्दी देना चाहिए था। सात दिनों में हाई कोर्ट ने आदेश दिया।
  • एएसजी ने कहा कि हाई कोर्ट के पास बहुत बोझ है और केजरीवाल ने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका भी दाखिल की थी जिसपर हाई कोर्ट ने सुनवाई की।

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