देशभर के वक्फ बोर्डों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा जारी है। विधेयक के माध्यम से मौजूदा वक्फ कानून में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। हालांकि, विपक्ष इसे असंवैधानिक बताते हुए इसका विरोध कर रहा है।
विधेयक पर 11 घंटे की चर्चा के बाद लोकसभा में मतदान प्रक्रिया जारी है, जिसमें कुल 390 वोट डाले गए हैं। अब विधेयक पर स्पीकर की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस दौरान कहा कि वह सभी नेताओं का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने विधेयक पर अपनी राय रखी। उन्होंने विपक्ष द्वारा विधेयक को असंवैधानिक कहे जाने पर सवाल उठाया और कहा कि यदि यह असंवैधानिक होता, तो अदालत इसे रद्द कर देती। उन्होंने कहा कि असंवैधानिक जैसे शब्दों का इस्तेमाल हल्के में नहीं करना चाहिए और यह विधेयक संविधान के खिलाफ नहीं है।
इस बयान के बाद किरेन रिजिजू ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि ओवैसी ने यह आरोप लगाया कि वक्फ में मुसलमानों और उनके बच्चों के लिए प्रावधान किए जा रहे हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए क्यों नहीं? इस पर रिजिजू ने कहा कि हिंदुओं के लिए पहले ही प्रावधान मौजूद हैं और इसके लिए नया कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है।
इसके बाद, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ जोरदार विरोध किया और कहा कि यह विधेयक भारत के मुसलमानों की इबादत पर हमला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुसलमानों के खिलाफ एक जंग छेड़ रही है और यह जंग उनके खिलाफ है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ अन्याय है। ओवैसी ने यह भी कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य मुसलमानों को अपमानित करना है। इसके बाद उन्होंने गांधी के रास्ते पर चलते हुए वक्फ बिल को फाड़ने की बात भी कही।
इस दौरान, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेता जगदंबिका पाल ने ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी ने बिल को असंवैधानिक कहा, लेकिन बिल को फाड़ना खुद एक असंवैधानिक कार्य है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने जेपीसी द्वारा दिए गए सभी सुझावों को स्वीकार किया है और उन्हें लागू किया है।
वक्फ संशोधन विधेयक पर यह तीखी बहस जारी है और अब देखना यह है कि लोकसभा में इस बिल के पास होने के बाद इसका आगामी प्रभाव क्या होगा।



