भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य के 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू करने का फैसला किया गया है। यह प्रतिबंध एक अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि इन नगरों की शराब दुकानें स्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी और इन्हें अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया जाएगा।
कैबिनेट के इस फैसले का उद्देश्य प्रदेश के धार्मिक महत्व वाले नगरों को शराबमुक्त बनाना है। इसके साथ ही, नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किमी के दायरे में भी शराब की दुकानों को बंद किया जाएगा।
उज्जैन और अन्य धार्मिक नगरों में शराबबंदी
महाकाल ज्योतिर्लिंग की उपस्थिति के कारण उज्जैन को पूरी तरह शराबमुक्त किया जाएगा। यहां नगर निगम क्षेत्र की सभी शराब दुकानें बंद होंगी। इसी प्रकार, पीतांबरा पीठ के कारण दतिया में, नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में, और पशुपतिनाथ मंदिर के कारण मंदसौर में भी शराबबंदी लागू की जाएगी। मैहर में माता शारदा के मंदिर और पन्ना में भी शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी।
धार्मिक नगरों की सूची
शराबबंदी लागू होने वाले 17 धार्मिक नगरों में उज्जैन, दतिया, अमरकंटक, मंदसौर, मैहर, पन्ना, मंडला (नगर पालिका), मुलताई (नगर पालिका), सलकनपुर (ग्राम पंचायत), बरमानकलां, लिंगा, बरमानखुर्द (ग्राम पंचायत), कुंडलपुर (ग्राम पंचायत), बांदकपुर (ग्राम पंचायत), ओंकारेश्वर (नगर पंचायत), महेश्वर (नगर पंचायत), मण्डलेश्वर (नगर पंचायत), ओरछा (नगर पंचायत), और चित्रकूट (नगर पंचायत) शामिल हैं।
पूरी शराबबंदी की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य में पूर्ण शराबबंदी की दिशा में पहला चरण है। भविष्य में पूरे प्रदेश में शराबबंदी लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।



