देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक संबोधन और अधिकारिक उद्घोषणा के साथ मंगलवार शाम को उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलों का रंगारंग शुभारंभ हुआ। देहरादून स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री ने खेलों को देश की साख बढ़ाने वाला बताया।

उन्होंने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड आज युवा ऊर्जा से और भी दिव्य हो उठा है। बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ और मां गंगा के आशीर्वाद के साथ ये नेशनल गेम्स शुरू हो रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने आयोजन के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी टीम को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने खेलो इंडिया और अन्य खेल कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि खेल युवाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का माध्यम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दस वर्षों में खेल बजट तीन गुना बढ़ाया गया है।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि ओलंपिक जैसे आयोजनों से देश को न केवल खेलों में बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी गति मिलती है।
ग्रीन गेम्स की थीम पर 38वें नेशनल गेम्स:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि इस बार के राष्ट्रीय खेलों का आयोजन “ग्रीन गेम्स” थीम पर किया जा रहा है। आयोजन में सौर ऊर्जा और प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 दिवसीय इस आयोजन में देशभर के 10,000 से अधिक खिलाड़ी 35 खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मार्च पास्ट:
उद्घाटन समारोह में बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल, पवनदीप राजन और पांडवाज बैंड ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खिलाड़ियों की परेड का नेतृत्व सैनिक स्कूल घोड़ाखाल की बैंड टीम ने किया।
ओलंपियन लक्ष्य सेन ने मशाल प्रज्वलित कर खेलों की शुरुआत की। इसके साथ ही खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेलों की शपथ दिलाई गई।

प्रधानमंत्री ने की खिलाड़ियों से मुलाकात:
प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर उत्तराखंड के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनके उत्साह की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, “खेलों से देश की प्रोफाइल बढ़ती है, और स्पोर्ट्स इकोनॉमी हमारी आर्थिक प्रगति का अहम हिस्सा बनेगी।”

उत्तराखंड में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा:
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था केवल चारधाम यात्रा पर निर्भर नहीं रह सकती। शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
समारोह का समापन 2025 शंखों की ध्वनि और जोरदार शंखनाद से हुआ।





