टनकपुर (चम्पावत): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को उत्तर भारत के प्रसिद्ध माँ पूर्णागिरि मेला का शुभारंभ ठूलीगाड़, टनकपुर (चम्पावत) में किया। इस अवसर पर उन्होंने मां पूर्णागिरी को नमन करते हुए प्रदेश की समृद्धि, तरक्की और शांति की कामना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान मेला क्षेत्र में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरी पूर्णागिरी मेला क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के लिए स्मार्ट कंट्रोल रूम और सीसीटीवी निगरानी तंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, पूर्णागिरि मेले के लिए सेलागाढ़ में एक बहुउद्देशीय प्रशासनिक भवन बनाने की योजना है, जिसमें मेला मजिस्ट्रेट, मेला अधिकारी, पुलिस और चिकित्सक एक ही स्थान पर काम करेंगे। इसके अलावा, लादीगाड़ में पूर्णागिरि पंपिंग पेयजल योजना और ठूलीगाड़ व बाबलीगाड़ पंपिंग परियोजना की घोषणा भी की गई।
धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में पूर्णागिरि का विकास
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को देवी-देवताओं की भूमि बताते हुए कहा कि यहां के हर कण में दिव्यता समाई हुई है। उन्होंने बताया कि माँ पूर्णागिरी धाम उत्तराखंड का प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है और यह क्षेत्र आने वाले समय में और भव्य और सुव्यवस्थित होगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस धाम को वर्षभर चलने वाले मेला के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित है।
पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से चम्पावत के अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने का आग्रह किया और कहा कि हमें यात्रा के साथ-साथ आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त करना चाहिए। राज्य सरकार मां पूर्णागिरि धाम के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और इसे एक विशाल पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करेगी। उन्होंने बताया कि पूर्णागिरि धाम में रोपवे निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे यात्रियों को सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।
संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
टनकपुर स्थित मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ उत्तर भारत में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मंदिर नेपाल से निकलने वाली काली नदी के किनारे अन्नपूर्णा चोटी पर स्थित है और समुद्र तल से 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर को चमत्कारों के लिए जाना जाता है और यह स्थान देवी सती की नाभि गिरने के स्थान के रूप में भी प्रसिद्ध है। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहां दर्शन करने से पुण्यलाभ प्राप्त होता है।



