राष्ट्रपति ने ‘आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025’ को दी मंजूरी, जाली पासपोर्ट और वीजा पर कड़ी सजा

  • जाली पासपोर्ट और वीजा के इस्तेमाल पर सात साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना।

  • विदेशी नागरिकों से संबंधित होटलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जानकारी देने का नया प्रावधान।

  • पुराने आव्रजन और पासपोर्ट कानून निरस्त, नया विधेयक लागू।

नई दिल्ली:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद यह अब कानून बन गया है। इस कानून के तहत भारत में प्रवेश करने, रहने या देश से बाहर जाने के लिए जाली पासपोर्ट या वीजा का उपयोग करने पर दो से सात वर्ष तक की सजा और एक लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इसे राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से तुरंत अधिसूचित कर दिया गया। यह विधेयक लोकसभा से 7 मार्च और राज्यसभा से 2 अप्रैल को पारित हुआ था।

नए कानून के तहत होटलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को विदेशियों के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश में रह रहे लोग निर्धारित अवधि से अधिक समय तक न ठहरें और इस पर नजर रखी जा सके।

कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान: अगर कोई व्यक्ति भारत में प्रवेश करने, देश में रहने या बाहर जाने के लिए जाली पासपोर्ट या वीजा का उपयोग करता पाया जाता है, तो उसे सात साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जानबूझकर जाली पासपोर्ट का उपयोग करने पर कम से कम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है, जो सात साल तक बढ़ सकता है। दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिसे 10 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

अगर कोई विदेशी नागरिक बिना वैध यात्रा दस्तावेज के भारत में प्रवेश करता है, तो उसे पांच साल तक की सजा, 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।

नए अधिकार और पुराने कानूनों का निरस्तीकरण: नया विधेयक केंद्र सरकार को उन स्थानों पर नियंत्रण करने का अधिकार देता है जहां विदेशियों का आना-जाना रहता है। इसके तहत मालिकों को परिसर को बंद करने, शर्तों के साथ उपयोग की अनुमति देने या विदेशी नागरिकों को प्रवेश से मना करने का अधिकार मिलेगा।

यह नया विधेयक पहले से मौजूद चार प्रमुख कानूनों—पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939, विदेशी अधिनियम, 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 को निरस्त करता है।

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