श्री केदारनाथ धाम यात्रा ने इस वर्ष एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यात्रा के केवल 48 दिनों में कुल कारोबार 300 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इसमें घोड़ा-खच्चर, हेली सेवा, डंडी-कंडी, टैक्सी संचालन, होटल, टेंट और रेस्तरां जैसे विभिन्न क्षेत्रों का योगदान शामिल है। इस बढ़ती हुई यात्रा से न सिर्फ पर्यटन को गति मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
11.4 लाख श्रद्धालु पहुंचे बाबा के दरबार
2 मई 2025 को बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद से अब तक 11 लाख 40 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। औसतन प्रतिदिन करीब 24 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर रहे हैं।
मुख्य क्षेत्रों से हुई आय का विवरण:
घोड़ा-खच्चर संचालन: 67 करोड़ रुपये
करीब 20 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा में बुजुर्ग व असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए घोड़ा-खच्चर अहम सहारा हैं। इस बार 8000 पंजीकृत घोड़े-खच्चरों ने 2.27 लाख से अधिक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया, जिससे कुल आय 66.73 करोड़ रुपये हुई।
हेली सेवा: 60 करोड़ रुपये
नौ हेलीपैड से आठ हेली कंपनियों द्वारा संचालित सेवाओं से 49,247 श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे। हेली सेवाओं ने अब तक 60 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। साथ ही मेडिकल इमरजेंसी में भी हेली सेवाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं।
डंडी-कंडी सेवा: 2 करोड़ रुपये से अधिक
7000 से अधिक पंजीकृत डंडी-कंडी चालकों के माध्यम से अब तक 2.02 करोड़ रुपये की आय हुई है। छोटे बच्चों और चलने में अक्षम श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है।
टैक्सी संचालन: 14.5 करोड़ रुपये
225 पंजीकृत गाड़ियों द्वारा सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक शटल सेवा चलाई जा रही है। इस सेवा से करीब 11.4 करोड़ रुपये की आय हुई है। विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के लिए 25 गाड़ियां आरक्षित की गई हैं।
होटल, टेंट और रेस्तरां व्यापार: 150 करोड़ रुपये से अधिक
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 2000 से अधिक होटल, टेंट और भोजनालय संचालित हो रहे हैं। एक यात्री द्वारा औसतन 1500-2000 रुपये खर्च किए जाने के अनुमान के आधार पर, अब तक कुल कारोबार 150 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
इसके अतिरिक्त, गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के 15 प्रतिष्ठानों ने अब तक करीब 5 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा
महिला स्वयं सहायता समूहों, टैक्सी चालकों, होटल व्यवसायियों और पशु पालकों सहित हजारों स्थानीय लोगों को इस यात्रा से आर्थिक संबल मिला है। शासन-प्रशासन द्वारा भी यात्रा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।



