चार धाम यात्रा पर भारी बारिश और बर्फबारी के कारण दो दिन स्थगन, हेलिकॉप्टर सेवा और राफ्टिंग बंद

उत्तराखंड में लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ा, 57 सड़कें बंद, ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड का काम रोका गया

चार धाम यात्रा का दो दिन का स्थगन

उत्तराखंड के मौसम विभाग की चेतावनी के बाद केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा 27 और 28 सितंबर तक रोक दी गई। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने रविवार तक यात्रा को स्थगित करने का आदेश दिया।

हेलिकॉप्टर सेवाओं पर असर

केदारनाथ और श्रीनगर से संचालित हेलिकॉप्टर सेवाएँ भी बंद हो गईं। शनिवार को केदारनाथ के लिए कोई हेली सेवा नहीं चल पाई, जबकि श्रीनगर से भी उड़ानें बाधित रहीं।

बर्फबारी और बर्फ की स्थिति

चमोली जिले के ऊँचे इलाकों में लगातार बर्फबारी जारी है। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, नीती और माणा घाटियों में बर्फ जमा हुई है। हेमकुंड साहिब पर लगभग आधा फुट बर्फ जमने से आस्था पथ पर फिसलन बढ़ गई। पुलिस और SDRF के जवानों ने तीर्थयात्रियों को सुरक्षित मार्ग से पार कराया।

राफ्टिंग और उड़ानों पर प्रभाव

लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया, जिससे राफ्टिंग गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। देहरादून में तीन उड़ानें डाइवर्ट की गईं और एक रद्द कर दी गई; बाकी उड़ानों का समय बदला गया।

गिरावट और किसानों पर असर

उत्तरकाशी के गंगोत्री गोमुख ट्रैक पर एक बुजुर्ग यात्री पैर फिसलने के बाद नदी के तेज बहाव में बह गया। नई टिहरी में तेज हवाओं और बारिश के कारण किसानों की धान की फसल खेतों में बिछ गई।

ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड का रोका जाना

गढ़वाल आयुक्त के आदेश मिलने के बाद एआरटीओ कार्यालय में ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड का काम रोक दिया गया। यात्रियों को ट्रांजिट कैंप में रुकने के लिए कहा गया।

आपातकालीन परिचालन केंद्रों की निगरानी

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट पर है। मंत्री मदन कौशिक, सचिव विनोद कुमार सुमन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की समीक्षा की और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया।

सड़क बंद और जल स्तर

बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में 57 मार्ग बंद हैं: अल्मोड़ा (2), बागेश्वर (4), चमोली (8), देहरादून (8), नैनीताल (11), पौड़ी (3), पिथौरागढ़ (11), रुद्रप्रयाग (3), टिहरी (5) और उत्तरकाशी (2)। गंगा, सरयू, अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के पास पहुँच गया।

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