उत्तराखंड:बीती रात ऋषिकेश में हुए एक सड़क हादसे में यूकेडी के वरिष्ठ नेता त्रिवेन्द्र पंवार सहित दो लोगों की दुखद मृत्यु के बाद, राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और व्यापक कार्ययोजना की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में, वरिष्ठ नेता अनूप नौटियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एक वीडियो संदेश जारी कर राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के खतरे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
सड़क सुरक्षा पर गंभीरता से काम करने की अपील
अनूप नौटियाल ने कहा कि राज्य में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर केवल अधिकारियों का निलंबन और मुख्यमंत्री के निर्देशों से कोई स्थायी समाधान नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में चल रही जांचों और निर्देशों से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके बजाय, उन्होंने राज्य में एक ‘सुरक्षित उत्तराखंड अभियान’ की शुरुआत करने की जरूरत बताई। इस अभियान के तहत चार प्रमुख पहलुओं पर काम किया जाएगा:
- इंफोर्समेंट (अधिकारों का पालन)
- एजुकेशन (शिक्षा)
- इंजीनियरिंग (सड़क निर्माण)
- इमरजेंसी केयर (आपातकालीन देखभाल)
मुख्यमंत्री से विश्वासपात्र व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपने की मांग
नौटियाल ने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि वे सड़क सुरक्षा पर काम करने के लिए किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपें, जो अगले दो वर्षों तक सड़क सुरक्षा पर अपना 80 प्रतिशत समय समर्पित करे। इस व्यक्ति को देशभर में उपलब्ध सर्वोत्तम सड़क सुरक्षा मॉडल्स का अध्ययन करके उत्तराखंड के लिए उपयुक्त और प्रभावी सुरक्षा मॉडल तैयार करना चाहिए।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर प्रयासों का आह्वान
अपने संदेश में नौटियाल ने कहा, “यदि सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो यह सिलसिला कभी थमने वाला नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले अनगिनत लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए हमें सच्चे अर्थों में ‘सुरक्षित उत्तराखंड’ अभियान को लागू करना होगा।” उन्होंने राज्य के नागरिकों से अपील की कि वे इस मुहिम में अपना समर्थन दें ताकि राज्य को एक सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त उत्तराखंड बनाया जा सके। यदि सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दुर्घटनाओं की संख्या और भी बढ़ सकती है। अनूप नौटियाल ने यह भी कहा कि यदि सड़क सुरक्षा के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो राज्य में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



