उत्तराखंड के पंचायत चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है।
प्रदेश के 12 जिलों में ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत उपाध्यक्ष और सात जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनाव हुए। इनमें से 10 जिलों में भाजपा ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को सिर्फ देहरादून में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सफलता मिली। हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव नहीं हुए थे, वहीं नैनीताल में कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ताओं के विवाद के चलते मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है और नतीजा अभी आना बाकी है।
किस जिले में कौन बना जिला पंचायत अध्यक्ष
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उधमसिंह नगर – अजय मौर्य (भाजपा)
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चंपावत – आनंद सिंह अधिकारी (भाजपा)
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पिथौरागढ़ – जितेंद्र प्रसाद (भाजपा)
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उत्तरकाशी – रमेश चौहान (भाजपा)
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चमोली – दौलत सिंह बिष्ट (भाजपा)
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अल्मोड़ा – हेमा गैड़ा (भाजपा)
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रुद्रप्रयाग – पूनम कठैत (भाजपा)
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पौड़ी – रचना बुटोला (भाजपा)
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बागेश्वर – शोभा आर्या (भाजपा)
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टिहरी – इशिता सजवाण (भाजपा)
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देहरादून – सुखविंदर कौर (कांग्रेस)
(नैनीताल का नतीजा शेष, हरिद्वार में चुनाव नहीं हुए।)
निर्दलीयों की किंगमेकर भूमिका
जिला पंचायत सदस्य की 358 सीटों में से 145 पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की। भाजपा समर्थित 121 और कांग्रेस समर्थित 92 प्रत्याशी विजयी रहे। कई जिलों में अध्यक्ष पद की जीत का फैसला निर्दलीयों के समर्थन से हुआ। देहरादून में कांग्रेस के पास 13 सदस्य थे, जिनके साथ चार निर्दलीय जुड़ गए, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कौर जीत गईं। वहीं, अन्य जिलों में भाजपा को भी निर्दलीयों का साथ मिला।
राजनीतिक संदेश
पंचायत चुनावों के परिणाम ने भाजपा का मनोबल ऊंचा कर दिया है और इसे 2027 विधानसभा चुनावों का ट्रेलर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा ने कांग्रेस को गहरे संकट में डाल दिया है।



