केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में मेजर बॉब खाथिंग की याद में आयोजित कार्यक्रम में भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच अपनी हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर में संतुलन बनाए हुए है। आज भारत की आवाज को दुनियाभर में सुना जाता है, जो मेजर खाथिंग के आदर्शों और सिद्धांतों का परिणाम है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि मेजर बॉब खाथिंग भारत के महान सपूत थे, जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपनी बहादुरी और कूटनीति से देश के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। उनके योगदान को याद करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को अपनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। मेजर खाथिंग ने राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के एकीकरण में अमूल्य योगदान दिया।
रक्षा मंत्री ने इस मौके पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग में ‘मेजर रालेंगनाओ बॉब खाथिंग वीरता संग्रहालय’ के वर्चुअल उद्घाटन की याद भी की और कहा कि सरकार की विदेश नीति में भी मेजर खाथिंग जैसे व्यक्तित्वों की कूटनीति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने मेजर खाथिंग के सिद्धांतों से प्रेरणा लेने की अपील की और कहा कि मेजर खाथिंग ने एक भी गोली चलाए बिना तवांग को भारत में मिलाया, जो भारत की एकता और अखंडता को मजबूती देने वाला कदम था।
इसके अलावा, रक्षा मंत्री ने भारत सरकार की प्रशासनिक सुधारों और ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत सरकार ने लोगों और प्रशासन के बीच की खाई को कम किया है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी साझा किया और कहा कि यह क्षेत्र भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रक्षा मंत्री ने मेजर खाथिंग की स्थायी विरासत को प्रदर्शित करने वाली फोटो गैलरी का दौरा किया और उनके जीवन तथा सेवा पर आधारित एक फिल्म की स्क्रीनिंग में भी भाग लिया। दिल्ली छावनी में भारतीय सेना, असम राइफल्स और यूएसआई (यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया) ने मेजर बॉब खाथिंग की श्रद्धांजलि में स्मारक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें उनके जीवन और योगदान को सम्मानित किया गया।



