उत्तराखंड की वादियों से बड़े पर्दे तक पहुँची ‘गोदान’, 6 फरवरी से देशभर में होगी रिलीज

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सिनेमाई माहौल उस समय खास बन गया, जब पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने सुभाष रोड स्थित अपने कैंप कार्यालय में गौमाता के महत्व पर आधारित फीचर फिल्म ‘गोदान’ के टीजर, गाने और पोस्टर का भव्य लॉन्च किया। यह फिल्म कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के बैनर तले बनाई गई है और 6 फरवरी 2026 से देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।

लॉन्च कार्यक्रम में फिल्म की पूरी टीम के साथ कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस अवसर पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विश्व संवाद केंद्र के प्रबंधक सुरेंद्र मित्तल, कामधेनु गौशाला समिति की सदस्य मनिका शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

“सनातन की आत्मा गौमाता में” – सतपाल महाराज

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि “सनातन संस्कृति की आत्मा गौमाता में बसती है। आज के दौर में जब समाज अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है, ऐसे समय में ‘गोदान’ जैसी फिल्में लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।”

उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ गौमाता के महत्व को प्रस्तुत करती है। उनके अनुसार, यह सिनेमा के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने की एक बड़ी पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि “यदि गौहत्या जैसे अपराधों में लिप्त लोग भी यह फिल्म देख लें, तो उनके विचारों में परिवर्तन संभव है।”

बदलते दौर का सिनेमा, सामाजिक विषयों पर फोकस

सतपाल महाराज ने फिल्म इंडस्ट्री में आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि अब सिनेमा सिर्फ पारिवारिक कहानियों तक सीमित नहीं है। निर्माता-निर्देशक सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। ‘गोदान’ इसी बदलाव का उदाहरण है, जो मनोरंजन के साथ समाज को संदेश देने का प्रयास करती है।

40 करोड़ की लागत, कई शहरों में हुई शूटिंग

फिल्म के निर्देशक विनोद चौधरी के निर्देशन में बनी ‘गोदान’ लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। इसकी शूटिंग उत्तराखंड की प्राकृतिक वादियों, नोएडा, मथुरा और मुंबई के विभिन्न स्थानों पर की गई है। फिल्म की कहानी को प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें कुछ वास्तविक घटनाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे इसका सामाजिक संदेश और अधिक प्रामाणिक बनता है।

युवाओं को जोड़ने की कोशिश

फिल्म निर्माताओं के अनुसार, ‘गोदान’ केवल एक धार्मिक या आध्यात्मिक फिल्म नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक माध्यम है। फिल्म में मनोरंजन, संगीत और भावनात्मक दृश्यों के साथ एक गंभीर सामाजिक संदेश भी समाहित किया गया है।

कुल मिलाकर, ‘गोदान’ को एक ऐसी फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो सिनेमा के जरिए भारतीय संस्कृति, गौसंरक्षण और आध्यात्मिक मूल्यों पर संवाद शुरू करने की कोशिश है। अब देखना यह होगा कि 6 फरवरी को रिलीज के बाद दर्शक इसे किस तरह अपनाते हैं।

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