जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले के जवाब में भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के खिलाफ पांच बड़े और सख्त फैसले लिए हैं। इन फैसलों में सबसे अहम सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को अस्थायी रूप से सस्पेंड करना शामिल है — जो कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 से लागू एक ऐतिहासिक जल संधि रही है।
भारत के पांच बड़े फैसले जो पाकिस्तान को झकझोर गए:
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सिंधु जल संधि अस्थायी रूप से निलंबित
भारत ने पहली बार इस संधि को निलंबित कर दिया है, जो विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में लागू हुई थी। यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ रणनीतिक भी माना जा रहा है। -
राजनयिक स्टाफ में कटौती
दोनों देशों के मिशनों में कार्यरत स्टाफ को 55 से घटाकर 30 किया जाएगा, जिसकी समयसीमा 1 मई निर्धारित की गई है। -
अटारी चेकपोस्ट बंद
अमृतसर स्थित अटारी बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। -
SAARC वीजा छूट योजना समाप्त
SAARC वीजा योजना के तहत भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। -
पाकिस्तानी रक्षा सलाहकार निष्कासित
भारत में मौजूद पाकिस्तानी सेना, वायुसेना और नौसेना के रक्षा सलाहकारों को Persona Non Grata घोषित कर देश छोड़ने के आदेश दिए गए हैं।
विदेश मंत्रालय की सख्त चेतावनी
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद को लेकर Zero Tolerance Policy पर है और यह कदम उसी नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “अब सिर्फ़ बयान नहीं, कार्रवाई होगी।”
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: “यह ओवररिएक्शन है”
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के कदमों को “भावनात्मक प्रतिक्रिया” बताते हुए अस्वीकार किया है। उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा कि भारत ने कोई पुख्ता सबूत नहीं दिया है और जल्द ही पाकिस्तान की National Security Committee (NSC) की बैठक के बाद आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।
क्या सिंधु जल संधि का अंत निकट है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सस्पेंशन भारत की ओर से एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत है। यदि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर नियंत्रण नहीं करता, तो यह संधि स्थायी रूप से समाप्त हो सकती है — जिससे पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर गहरा असर पड़ेगा।
भारत के इन सख्त फैसलों से स्पष्ट है कि अब देश केवल कड़े बयान नहीं, बल्कि कड़े कदम उठाने के रास्ते पर है। यह कूटनीतिक सख्ती पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भी भारत की सुरक्षा नीति की दृढ़ता को दर्शाती है।



