उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया। मंगलवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पंचायत चुनाव में मिली करारी हार की खीज अब सदन के कामकाज पर निकाल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भराड़ीसैंण हम सबकी भावनाओं का केंद्र है, इसलिए सरकार ने मानसून के दौरान भी यहां सत्र आहूत करने का निर्णय लिया। तमाम विधायक और अधिकारी सड़क बंद होने जैसी कठिनाइयों के बावजूद यहां पहुंचे हैं ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सके। लेकिन विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर चर्चा की आड़ में सदन की कार्यवाही बाधित की, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
धामी ने पंचायत चुनावों को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष न होते तो देहरादून और बाजपुर में कांग्रेस कैसे जीतती, या नैनीताल में अध्यक्ष भाजपा और उपाध्यक्ष कांग्रेस से कैसे चुने जाते। विपक्ष हर बार चुनाव हारने के बाद ईवीएम, चुनाव आयोग और सरकार पर आरोप लगाता है, जो गलत परंपरा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मौजूदा सत्र में सरकार अनुपूरक बजट और कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर रही है। इनमें उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक, 2025 प्रमुख है, जिससे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे तो इस पर रचनात्मक सुझाव दे, सरकार उन्हें मानने के लिए तैयार है।
आपदा प्रबंधन पर बोलते हुए सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सरकार ने ग्राउंड जीरो पर रहकर राहत-बचाव कार्य किए। धराली समेत सभी प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन विपक्ष आपदा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है।



