चमोली में भूकंप के झटकों से फिर डोली धरती, दहशत में लोग

उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार देर रात 2:44 बजे धरती एक बार फिर कांपी। रिक्टर पैमाने पर 3.3 तीव्रता वाले भूकंप से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। झटकों के तुरंत बाद लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर दौड़ पड़े। सौभाग्यवश इस भूकंप से किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ।

भूकंप का केंद्र और वैज्ञानिक विश्लेषण
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र चमोली में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। गौरतलब है कि इसी महीने 6 जुलाई को अल्मोड़ा और 8 जुलाई को उत्तरकाशी में भी भूकंप दर्ज किया गया था। यह पिछले 30 दिनों में उत्तराखंड में तीसरा और चमोली जिले में 15 दिनों के भीतर दूसरा भूकंप है।

बार-बार कांपते पहाड़, वैज्ञानिकों की चेतावनी
उत्तराखंड के पर्वतीय जिले — चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ — सिस्मिक ज़ोन 4 और 5 में आते हैं, जो देश के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्र माने जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बार-बार आने वाले छोटे झटके भविष्य में बड़े भूकंप की संभावनाओं के संकेत हो सकते हैं।

विज्ञानियों ने चेताया है कि पिछले 500 वर्षों में इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, जिससे वर्तमान काल एक बड़े भूकंपीय चक्र की ओर संकेत करता है।

भूकंप क्या है और कैसे मापा जाता है?
पृथ्वी के भीतर की सात टेक्टॉनिक प्लेट्स जब एक-दूसरे से टकराती हैं, तो जमीन में भारी ऊर्जा का विस्फोट होता है, जिससे धरती हिलती है — यही भूकंप होता है। भूकंप की तीव्रता को ‘रिक्टर स्केल’ पर मापा जाता है, जो 1 से 9 तक के पैमाने पर इसकी शक्ति को दर्शाता है।

पिछले भूकंपों की जानकारी:

  • 1999, चमोली – 6.6 तीव्रता, भारी जानमाल का नुकसान

  • 6 जुलाई 2025, अल्मोड़ा – 3.4 तीव्रता

  • 8 जुलाई 2025, उत्तरकाशी – 3.2 तीव्रता

  • 19 जुलाई 2025, चमोली – 3.3 तीव्रता

सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड में
भूकंप की लगातार घटनाओं को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को सतर्क रहने और आपातकालीन योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। चमोली प्रशासन भी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

जनता से प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क अवश्य रहें। भूकंप के दौरान खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं, मजबूत टेबल या दीवार के कोने में शरण लें और बाहर हैं तो खुले क्षेत्र में जाकर इमारतों, खंभों व पेड़ों से दूर रहें।

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