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बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम कदम साबित होगा: अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में की ऐतिहासिक घोषणा, बस्तर के विकास और युवाओं के उज्जवल भविष्य की बात की

जगदलपुर, 16 दिसंबर 2024: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में ऐतिहासिक बयान दिया कि यह ओलंपिक नक्सलवाद के ताबूत में अंतिम कील ठोकने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक लाखों आदिवासी युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से रोकेगा और उन्हें भारत निर्माण से जोड़ेगा। समापन सत्र में गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मौजूद थे। इस दौरान नुवा बाट के व्हीलचेयर रेस, रिले रेस, रस्साकसी समेत विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं के फाइनल मुकाबले हुए, साथ ही बस्तर अंचल के प्रसिद्ध नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दिखी।

गृहमंत्री शाह ने बस्तर ओलंपिक को न केवल एक खेल आयोजन बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास के प्रतीक के रूप में देखा। उन्होंने कहा, “बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद के खिलाफ एक संघर्ष है, जो इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की नई नींव डालने वाला है।” शाह ने विश्वास जताया कि 2026 के बस्तर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में वह यह कहेंगे कि “बस्तर बदल चुका है।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जब भी भारत को किसी अंतर्राष्ट्रीय खेल में मेडल मिलता है, उसमें से आधे मेडल आदिवासी बच्चों द्वारा लाए जाते हैं। उन्होंने बस्तर के विकास की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले एक साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया है, और बस्तर के गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है।

गृहमंत्री शाह ने बस्तर के दिव्यांग खिलाड़ियों द्वारा आयोजित व्हीलचेयर रेस को इस क्षेत्र के विकास की रेस करार दिया। उन्होंने कहा, “एक समय था जब बस्तर में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं, लेकिन अब बस्तर में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।” इसके साथ ही, शाह ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकार की डबल इंजन सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलंपिक को क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा, “बस्तर ओलंपिक ने इस क्षेत्र के युवाओं को खेल के माध्यम से सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन किया है, और अब यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा का उत्सव बन चुका है।” मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई और बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “नियद नेल्लानार योजना” के तहत सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

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