उत्तराखंड शासन में प्रशासनिक फेरबदल: पांच आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव

उत्तराखंड शासन ने एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, पांच आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए कुछ अधिकारियों का कार्यभार बढ़ाया गया है, जबकि कुछ से प्रभार वापस ले लिया गया है। इससे पहले भी सरकार द्वारा 12 से अधिक आईएएस और पीसीएस अधिकारियों का तबादला किया जा चुका है। शासन का कहना है कि यह बदलाव अधिकारियों के अनुभव और दक्षता के आधार पर किया गया है ताकि प्रशासनिक कार्यक्षमता और समन्वय को और बेहतर बनाया जा सके।

आईएएस रणवीर सिंह चौहान से ‘नमामि गंगे’ का प्रभार वापस

2009 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान से ‘परियोजना निदेशक नमामि गंगे’ का कार्यभार हटा लिया गया है। अब उनके पास सचिव गन्ना, चीनी, राज्य संपत्ति विभाग, परियोजना निदेशक केएफडब्ल्यू और महानिदेशक कृषि एवं उद्यान विभाग की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

नितिका खंडेलवाल को टिहरी विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त प्रभार

2015 बैच की आईएएस और टिहरी गढ़वाल की वर्तमान जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल को अब जिला विकास प्राधिकरण टिहरी गढ़वाल की उपाध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह पहले से टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना की निदेशक भी हैं।

गौरव कुमार को आईटी और हिल्ट्रॉन की अहम जिम्मेदारी

2017 बैच के आईएएस गौरव कुमार को अब अपर सचिव सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। वह वर्तमान में अपर सचिव शहरी विकास, निदेशक शहरी विकास निदेशालय और निदेशक आईटीडीए के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही, अब उन्हें हिल्ट्रॉन के प्रबंध निदेशक का भी कार्यभार सौंपा गया है।

विशाल मिश्रा को ‘नमामि गंगे’ परियोजना का दायित्व

2018 बैच के आईएएस विशाल मिश्रा को ‘परियोजना निदेशक नमामि गंगे’ की जिम्मेदारी दी गई है। यह दायित्व पहले रणवीर सिंह चौहान के पास था। विशाल मिश्रा वर्तमान में गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक और जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

अपूर्वा पांडे को ‘स्वजल’ का अतिरिक्त प्रभार

2018 बैच की आईएएस अपूर्वा पांडे, जो वर्तमान में अपर सचिव पेयजल और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, को अब निदेशक स्वजल का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है।

शासन के इस निर्णय को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक ढांचे को अधिक मजबूत और समन्वित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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