खेल जगत को बड़ा झटका: एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट और मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का निधन

नई दिल्ली/देहरादून। भारतीय खेल जगत से शुक्रवार को बेहद दुखद खबर सामने आई। देश के महान निशानेबाज, एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता और भारतीय शूटिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नई दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में अंतिम सांस ली।

जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय शूटिंग टीम के साथ हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में गए थे। भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद वह टीम के साथ भारत लौट रहे थे। इसी दौरान विमान यात्रा के समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें असहज महसूस होने लगा।

दिल्ली पहुंचने के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें एयरपोर्ट से सीधे साकेत स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया।

उत्तराखंड की धरती से निकला विश्वस्तरीय निशानेबाज

जसपाल राणा का जन्म वर्ष 1976 में उत्तराखंड के एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 के भारत-पाक युद्ध के सैनिक रहे थे। पिता ने ही बचपन में उन्हें निशानेबाजी का प्रशिक्षण देना शुरू किया और यही प्रशिक्षण आगे चलकर उन्हें देश के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल करने का आधार बना।

कम उम्र में ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें मात्र 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बाद में उन्हें पद्मश्री सम्मान भी प्राप्त हुआ।

राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल भारतीय निशानेबाजों में रहे शामिल

जसपाल राणा राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।

उनकी लगातार सफलता ने भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एशियाई खेलों में रचा इतिहास

एशियाई खेलों में भी जसपाल राणा का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने कुल चार स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। वर्ष 2006 के दोहा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर उन्होंने इतिहास रच दिया था।

उनकी यह उपलब्धि आज भी भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है।

कोच के रूप में भी बनाई अलग पहचान

सक्रिय खेल जीवन के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

भारतीय शूटिंग स्टार मनु भाकर सहित कई खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। कोच के रूप में भी उन्होंने भारतीय शूटिंग को मजबूती प्रदान की।

शिक्षा और खेल विकास में भी दिया योगदान

जसपाल राणा ने देहरादून में “जसपाल राणा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी” की स्थापना की थी। इस संस्थान के माध्यम से युवाओं को खेल और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

खेलों के विकास और समाज में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें उत्तराखंड के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल “उत्तराखंड गौरव सम्मान” से भी नवाजा गया था।

खेल जगत में शोक की लहर

जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, राजनीतिक क्षेत्र और उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने उन्हें भारतीय निशानेबाजी का एक युगपुरुष बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने शानदार खेल करियर, असाधारण उपलब्धियों और युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शक के रूप में जसपाल राणा हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद किए जाएंगे।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Latest Articles

spot_img
posjp33 posjp33 posjp33