नंदा की चौकी पुल से सिल्क्यारा रेस्क्यू तक, हर संकट में खुद मोर्चा संभालते नजर आए मुख्यमंत्री
देहरादून। उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों के दौरान लगातार सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। बीते कुछ वर्षों में राज्य में आई विभिन्न आपदाओं के दौरान उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की और त्वरित निर्णय लेकर प्रशासनिक मशीनरी को प्रभावी ढंग से संचालित किया।
हाल ही में देहरादून के नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी। सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। उनके निर्देशन में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और अन्य एजेंसियों ने युद्धस्तर पर कार्य करते हुए करीब 12 घंटे के भीतर एप्रोच रोड की मरम्मत कर यातायात बहाल कर दिया।
सिल्क्यारा रेस्क्यू बना मिसाल
नवंबर 2023 में उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग हादसे के दौरान मुख्यमंत्री धामी लगातार घटनास्थल पर डटे रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय एजेंसियों, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ और देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित कर 17 दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार निगरानी की। इस अभियान में 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसे बाद में ब्रिक्स देशों के आपदा प्रबंधन समूह ने भी ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सराहा।
धराली-हर्षिल आपदा में भी रहे सक्रिय
वर्ष 2025 में धराली-हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र से लगातार स्थिति की निगरानी की। प्रतिकूल मौसम के बावजूद उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही सेना, वायुसेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान की नियमित समीक्षा की।
चारधाम यात्रा और जोशीमठ संकट में भी दिखाई सक्रियता
चारधाम यात्रा के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध और अतिवृष्टि जैसी घटनाओं में मुख्यमंत्री लगातार कंट्रोल रूम और प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े रहे। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा, वैकल्पिक मार्ग, भोजन, चिकित्सा सहायता और मार्गों को शीघ्र खोलने के निर्देश दिए।
जोशीमठ भू-धंसाव के दौरान भी मुख्यमंत्री ने कई बार प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत, पुनर्वास और मुआवजा वितरण कार्यों की समीक्षा की। इसके अलावा मानसून के दौरान राज्यभर में भूस्खलन और सड़क क्षति की घटनाओं पर भी उन्होंने नियमित रूप से अधिकारियों से जानकारी लेकर राहत कार्यों में तेजी सुनिश्चित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के लिए आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा संकल्प है।
“हमारे लिए आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा का संकल्प भी है। हमारी प्राथमिकता है कि किसी भी संकट की स्थिति में सरकार और प्रशासन सबसे पहले प्रभावित लोगों तक पहुंचे, राहत एवं बचाव कार्यों में कोई कमी न रहे और सभी एजेंसियों के समन्वय से जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जाए।”
— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी



