पांडुकेश्वर/जोशीमठ: रविवार, 17 नवंबर की रात को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए थे, जिसके बाद सोमवार, 18 नवंबर को प्रात: श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी और आदि गुरु शंकराचार्य जी की पवित्र गद्दी योग बदरी पांडुकेश्वर मंदिर के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों और बदरी विशाल के उदघोष के साथ देव डोलियां पांडुकेश्वर पहुंची, जहां हर स्थान पर उनका भव्य स्वागत हुआ।

बीकेटीसी (बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने आज प्रात: दस बजे श्री बदरीनाथ धाम से श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी और आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी को पांडुकेश्वर के लिए रवाना किया। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी, प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी और पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल भी उपस्थित रहे।
देव डोलियों के साथ रावल अमरनाथ नंबूदरी, स्वामी मुकुंदानंद महाराज, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी और अन्य गणमान्य लोग भी इस यात्रा का हिस्सा बने।
श्री बदरीनाथ धाम से देव डोलियों के योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचने पर हनुमान चट्टी, लामबगड़ और पांडुकेश्वर बाजार में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देव डोलियों के दर्शन किए और पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
ज्ञातव्य है कि श्री उद्धव जी और श्री कुबेर जी शीतकाल में पांडुकेश्वर में निवास करेंगे, जबकि 19 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी रावल धर्माधिकारी वेदपाठी सहित श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ के लिए प्रस्थान करेगी। शीतकालीन पूजा 19 नवंबर से श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में शुरू होगी।



