भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना: विकास और वन्यजीव संरक्षण का संतुलित मॉडल

₹743 करोड़ की परियोजना में एलीफेंट अंडरपास, वृक्ष प्रतिरोपण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को दी गई प्राथमिकता


देहरादून। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) उत्तराखंड में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश (एनएच-07) फोर/सिक्स लेन परियोजना को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल राजमार्ग के रूप में विकसित कर रहा है। लगभग 20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का निर्माण ₹743 करोड़ की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है।

परियोजना के पूरा होने के बाद देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क बेहतर होगा। साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन और बढ़ते यातायात को सुरक्षित एवं सुगम बनाने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।

बढ़ते यातायात को मिलेगा समाधान

मौजूदा दो-लेन मार्ग पर प्रतिदिन करीब 18,456 वाहन गुजरते हैं। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट, पर्यटन गतिविधियों और चारधाम यात्रा के कारण भविष्य में यातायात और बढ़ने की संभावना को देखते हुए इस मार्ग का चौड़ीकरण आवश्यक माना गया है। नई सड़क से यात्रा समय कम होगा, जाम में राहत मिलेगी और सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

वन क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए NHAI ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 60 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) निर्धारित होता है, लेकिन इस परियोजना में वन क्षेत्र के भीतर इसे घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है, जिससे पेड़ों की कटाई को काफी हद तक कम किया जा सके।

इसके अलावा फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को प्रतिरोपण (Transplantation) के लिए चिन्हित किया गया है, जिन्हें आगामी मानसून में स्थानांतरित किया जाएगा।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान

यह परियोजना बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती है। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं, जिनमें—

  • 1 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास
  • 4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास
  • ग्रीन गाइड हेज
  • साउंड बैरियर
  • एंटी-ग्लेयर स्क्रीन
  • वन्यजीव चेतावनी संकेतक
  • स्पीड कैल्मिंग उपाय
  • निर्धारित नो हॉर्न जोन

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इस मार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं में 29 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है। इसे ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना और विशेष एलीफेंट अंडरपास विकसित किए जा रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

वैधानिक मंजूरी के बाद शुरू हुआ कार्य

NHAI के अनुसार परियोजना सभी आवश्यक पर्यावरणीय एवं वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद शुरू की गई है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत पेड़ों की कटाई और प्रतिरोपण की अनुमति प्रदान की गई है तथा परियोजना का कार्य सभी कानूनी और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए किया जा रहा है।

उत्तराखंड को होंगे ये प्रमुख लाभ

  • देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच बेहतर कनेक्टिविटी
  • चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए तेज एवं सुरक्षित यात्रा
  • ट्रैफिक जाम और यात्रा समय में कमी
  • सड़क सुरक्षा में सुधार
  • भविष्य के यातायात दबाव को संभालने में सक्षम आधुनिक राजमार्ग
  • वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए समर्पित अंडरपास
  • विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन

NHAI का कहना है कि यह परियोजना आधुनिक आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ उत्तराखंड के वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी उदाहरण है।

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