देवभूमि में भाजपा का ‘साइलेंट वार’

भाजपा ने प्रकोष्ठों को बनाया अपनी ‘ग्राउंड फोर्स’

हर वर्ग को साधने के लिए प्रकोष्ठों को मिली कमान

चुनावी फतह के लिए भाजपा ने रचा नया चक्रव्यूह

प्रकोष्ठों की कार्यशाला में चुनाव का ब्लूप्रिंट तैयार

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने अब अपने संगठनात्मक ढांचे को धार देना शुरू कर दिया है। राजधानी में आयोजित प्रदेश एवं जिला प्रकोष्ठ कार्यशाला केवल एक नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं रही, बल्कि इसे आगामी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कार्यशाला में निकाय, स्वयं सहायता समूह, पंचायत, एनजीओ, विधि और गोरखा प्रकोष्ठ के प्रदेश एवं जिला संयोजकों तथा सह-संयोजकों ने भाग लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में विभिन्न प्रकोष्ठों की भूमिका, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी कार्ययोजना पर विस्तृत मंथन हुआ।

भाजपा की रणनीति अब केवल पारंपरिक राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं दिख रही। पार्टी उन वर्गों तक भी अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है जो स्थानीय स्तर पर सामाजिक प्रभाव रखते हैं। पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, अधिवक्ता, सामाजिक संगठन और गोरखा समाज जैसे वर्गों के बीच सक्रिय प्रकोष्ठों को चुनावी तैयारी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के संकेत मिले हैं। भाजपा इस माडल के जरिए बूथ स्तर की संगठनात्मक ताकत को सामाजिक नेटवर्क से जोड़ना चाहती है, ताकि सरकारी योजनाओं, संगठन के संदेश और राजनीतिक अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके।

राहुल गांधी के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे और कांग्रेस के युवा केंद्रित अभियान के बीच भाजपा की यह कार्यशाला भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी विपक्ष के अभियान को केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि संगठन की मजबूती के जरिए जवाब देने की तैयारी कर रही है। भाजपा नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं की रैलियों से नहीं, बल्कि मजबूत संगठन और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के दम पर जीते जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार पार्टी आने वाले महीनों में प्रत्येक प्रकोष्ठ को लक्ष्य आधारित जिम्मेदारियां सौंप सकती है। सदस्यता विस्तार, सामाजिक संपर्क, लाभार्थियों तक पहुंच, बूथ सशक्तीकरण और स्थानीय मुद्दों पर संवाद जैसे अभियान प्रकोष्ठों के माध्यम से संचालित किए जा सकते हैं। यानी भाजपा केवल चुनावी प्रचार की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि एक ऐसे संगठनात्मक तंत्र को सक्रिय कर रही है जो मतदान तक लगातार मैदान में मौजूद रहे।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Latest Articles

spot_img
posjp33 posjp33 posjp33