कांग्रेस ने धामी सरकार के तीन सालों पर उठाए सवाल, यूसीसी और भ्रष्टाचार पर लगाया गंभीर आरोप

उत्तराखंड में धामी सरकार के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ एक जोरदार हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की नीतियों और कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है, जबकि असल में इस दौरान राज्य में समस्याओं का पिटारा खुला है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर है। रावत ने पलायन को लेकर सरकार की विफलता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग छह दर्जन गांव भूतहा बन चुके हैं और हर साल तीन से चार नए “घोस्ट विलेज” बन रहे हैं। इसके अलावा, जिला योजना का बजट घटने से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तीन गुना बढ़ गई है, क्योंकि डेंजर पॉइंट्स की संख्या बढ़ी है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला करते हुए कहा कि राज्य का कर्ज 35,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार बजट का सही उपयोग नहीं कर पाई है।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया और कहा कि राज्य में 40,000 से अधिक युवा ठेकेदारी पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार उपनल कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही है। खनन, आबकारी और अन्य विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपों का भी जिक्र किया।

हरीश रावत और यशपाल आर्य ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को उत्तराखंड की संस्कृति पर हमला करार दिया और कहा कि भाजपा समाज में द्वेष फैलाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सनातन धर्म की मूल भावना को नजरअंदाज करते हुए पारंपरिक विवाह संस्कारों पर आघात किया है।

करन माहरा ने महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के आठ वर्षों में महिलाओं की स्थिति और भी बदतर हो गई है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हुआ। विपक्ष का यह भी दावा है कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और जनता अब बदलाव चाहती है। कांग्रेस ने 14 तारीख से एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करने की घोषणा की है, जो छह महीने तक चरणबद्ध तरीके से चलेगा।

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