पूर्व सीएम हरीश रावत और प्रभारी कुमारी सैलजा की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
देहरादून। उत्तराखंड की चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में परिजनों के लिए न्याय की आवाज बुलंद करने और राज्यपाल की नई नियुक्ति के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सड़क पर उतरकर अपना कड़ा रुख जताया है। प्रदेश की राजधानी देहरादून में आयोजित एक बड़े कैंडल मार्च के दौरान पार्टी के शीर्ष नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में जलती मोमबत्तियां और सरकार विरोधी तख्तियां मौजूद थीं।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि राज्य में महिलाओं का सम्मान, बेटियों की सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी ने अंकिता के माता-पिता के संघर्ष का समर्थन किया और नई राज्यपाल नियुक्ति की टाइमिंग एवं राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल उठाए।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में निकला मार्च
देहरादून में हुए इस विरोध मार्च में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा प्रदेश कांग्रेस मामलों की प्रभारी कुमारी सैलजा समेत कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। नेताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिजनों को जब तक पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता और मामले से जुड़े तमाम अनुत्तरित सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिलते, तब तक पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
कांग्रेस ने इस आयोजन को केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन न मानकर राज्य की महिलाओं के स्वाभिमान और न्याय प्रणाली की साख से जुड़ा विषय बताया। पार्टी ने संकल्प दोहराया कि इस मुद्दे को हर सार्वजनिक मंच पर लगातार उठाया जाएगा।
हरीश रावत का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से भी राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटियों की गरिमा और प्रदेश का स्वाभिमान कांग्रेस के लिए सर्वोपरि है। सरकार चाहे विपक्ष को दबाने की कितनी भी कोशिश कर ले, जनता और विपक्ष की उठती आवाज को बंद नहीं किया जा सकता। अंकिता को इंसाफ दिलाने के लिए पार्टी का संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
दिल्ली घटनाक्रम के बाद गरमाई राजनीति
उल्लेखनीय है कि अंकिता भंडारी के माता-पिता हाल ही में अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने दिल्ली स्थित इंडिया गेट पहुंचे थे। वहां बिना पूर्व अनुमति संवेदनशील क्षेत्र में धरना देने का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। यद्यपि कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन इस घटना ने उत्तराखंड के राजनीतिक माहौल को बेहद गरमा दिया है। कांग्रेस ने इस बर्ताव पर कड़ा एतराज जताते हुए पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने का ऐलान किया है।
राज्यपाल नियुक्ति पर भी घेरा
अंकिता भंडारी मामले के अलावा, कांग्रेस ने इस कैंडल मार्च में राज्यपाल की नियुक्ति को भी विरोध का मुख्य बिंदु बनाया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि राज्य के सामाजिक और राजनीतिक हितों की रक्षा करना एक जिम्मेदार विपक्ष का कर्तव्य है। कांग्रेस इन दोनों मुद्दों पर अपनी असहमति दर्ज कराती रहेगी और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करेगी।





