अग्निसुरक्षा और पुलिस सत्यापन की अनदेखी से छात्रों की सुरक्षा खतरे में, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शिक्षा और रोजगार के लिए आने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती मांग के बीच शहर में पेइंग गेस्ट (पीजी) का कारोबार तेजी से फैल चुका है। हालांकि, इस मुनाफे वाले व्यवसाय में नियमों और मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। बिना वैध लाइसेंस, अग्निसुरक्षा मानकों की अनदेखी और अधूरे पुलिस सत्यापन के कारण इन पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी
राजधानी के विभिन्न इलाकों में आवासीय और व्यावसायिक भवनों को पीजी में बदल दिया गया है। इन भवनों में क्षमता से अधिक छात्रों को रखा जा रहा है, लेकिन आपातकालीन सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देहरादून के कई पीजी में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास व्यवस्था और विद्युत सुरक्षा मानकों की कमी पाई गई है।
सुरक्षा के प्रति इस लापरवाही का एक उदाहरण हाल ही में सेलाकुई के एक निजी छात्रावास में लगी आग के दौरान देखने को मिला। अग्निशमन विभाग की जांच में सामने आया कि इस छात्रावास के पास अनिवार्य फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) नहीं था। साथ ही, वहां स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर जैसी बुनियादी सुरक्षा प्रणालियां भी गायब थीं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
बढ़ती चिंताओं के बीच, देहरादून पुलिस ने अगस्त 2026 में प्रेमनगर क्षेत्र के पीजी और हॉस्टलों में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान संचालकों को शत-प्रतिशत पुलिस सत्यापन कराने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए थे।
इससे पहले, प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य आवासीय व्यवसायों पर भी सख्त रुख अपनाया था। मई 2026 में मानकों के विपरीत संचालित पाए जाने पर 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए थे। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में देहरादून के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए, अग्निसुरक्षा में कमियों के बावजूद फायर एनओसी जारी करने के जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया था।
एक व्यापक और संयुक्त जांच की आवश्यकता
जानकारों का मानना है कि केवल पुलिस सत्यापन और सीसीटीवी लगाने से पीजी नेटवर्क की समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए प्रशासन को एक संयुक्त जांच अभियान चलाना चाहिए। इस जांच में भवन की स्वीकृत क्षमता, अग्निसुरक्षा, स्वच्छता और विद्युत व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का आकलन किया जाना चाहिए।
प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वह शहर में संचालित हो रहे सभी पीजी का एक स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार करे और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सीलिंग जैसी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।




