मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने बीते तीन वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्टाचारियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है। सतर्कता विभाग की सक्रियता के चलते अब तक करीब 80 आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है।
ताजा मामला सितारगंज का है, जहां मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कमलेश को ₹2000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। वह नंदा गोरा योजना के तहत प्रमाणपत्र जारी करने के बदले छात्रा से पैसे मांग रही थी।
राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई प्रमुख कार्रवाइयों पर नजर डालें तो सरकारी विभागों से लेकर अधिकारी वर्ग तक पर शिकंजा कसा गया है। भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए सतर्कता विभाग को मजबूत किया गया और टोल-फ्री नंबर 1064 तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से जनता को सीधे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी गई, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाई है।
कुछ प्रमुख गिरफ्तारियां इस प्रकार हैं:
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लोक निर्माण विभाग, नैनीताल: AE को ₹10,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
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बिजली विभाग, हरबर्टपुर: JE को ₹15,000 लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
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एलआईयू, रामनगर: उप निरीक्षक व मुख्य आरक्षी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
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आरटीओ कार्यालय, कोटद्वार: वरिष्ठ सहायक को ₹3,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
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रोडवेज, काशीपुर: AGM को ₹90,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।
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खंड शिक्षा अधिकारी, खानपुर: शिक्षक से ₹10,000 की मांग पर गिरफ्तारी।
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जीएसटी कार्यालय, देहरादून: असिस्टेंट कमिश्नर को ₹75,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
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जिला आबकारी अधिकारी, रुद्रपुर: शराब कारोबारी से 10% कमीशन के नाम पर रिश्वत लेते गिरफ्तार।
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आबकारी इंस्पेक्टर, कर्णप्रयाग: ₹30,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
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कानूनगो, पौड़ी: जमीन सीमांकन के लिए ₹15,000 की मांग पर गिरफ्तार।
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सीएम हेल्पलाइन कर्मचारी, हरिद्वार: शिकायत सुलझाने के एवज में पैसे मांगने पर गिरफ्तारी।
मुख्यमंत्री धामी ने पदभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी या राजनैतिक व्यक्ति क्यों न हो। पहली बार उत्तराखंड में इस पैमाने पर कार्रवाई हो रही है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



