देहरादून। Pushkar Singh Dhami ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर मंगलवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र “सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद” होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मानसून के दौरान सभी विभागों को पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या और क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन वैज्ञानिक और चरणबद्ध तरीके से किया जाए ताकि किसी भी धाम या पड़ाव पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर सख्ती
मुख्यमंत्री धामी ने चारधाम यात्रा मार्गों पर रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही अनुमति दी जाए, जबकि दिन के समय ऐसे वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी धाम या पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ हो जाए तो नीचे बनाए गए होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की जाए। यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजा जाए ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे।
होल्डिंग एरिया में भोजन, पानी और पार्किंग की व्यवस्था जरूरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यात्रियों को केवल रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रतीक्षा का कारण, अनुमानित समय और आगे की स्थिति की स्पष्ट जानकारी भी लगातार दी जानी चाहिए।
उन्होंने पुलिस, प्रशासन और यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील, विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
एलईडी, सोशल मीडिया और एफएम रेडियो से मिलेगी लगातार सूचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से लगातार अपडेट जारी किए जाएं।
उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम में बदलाव, मार्ग अवरोध, यातायात जाम और दर्शन में देरी जैसी जानकारी समय रहते श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जाए, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा न हो।
मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और खराब मौसम बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में यात्रा प्रबंधन को और अधिक वैज्ञानिक, सतर्क और नियंत्रित तरीके से संचालित करना होगा।
उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को फील्ड में रहकर लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करने और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने को कहा।
होटल और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने तथा खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता जांच के निर्देश भी दिए।
उन्होंने पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए गए।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बढ़ेंगी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से Kedarnath Temple पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने तथा बारिश और धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
बैठक में कैबिनेट मंत्री Satpal Maharaj, विधायक अनिल नौटियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष Hemant Dwivedi समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।