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“आपातकाल लोकतंत्र का सबसे अंधकारमय काल था” – नैनीताल में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बड़ा बयान

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर नैनीताल में एक कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र के उस काले दौर को याद करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र की नींव को हिला कर रख दिया था।

धनखड़ ने कहा, “पचास वर्ष पहले, इसी दिन, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक भीषण संकट से गुज़रा। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत स्वार्थ में लोकतंत्र को कुचल दिया। राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित आपातकाल की घोषणा ने देश को अंधकार में धकेल दिया।”

उन्होंने उच्चतम न्यायालय की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “आपातकाल के दौरान सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका धूमिल हो गई थी। उस समय नौ उच्च न्यायालयों के निर्णयों को पलट दिया गया।”

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “आज का युवा उस अंधकारमय कालखंड से अनभिज्ञ नहीं रह सकता। यह आवश्यक है कि वह उस दौर को समझे, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।”

कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “शैक्षणिक संस्थान विचार और नवाचार के स्वाभाविक, जैविक प्रयोगशाला हैं। विश्वविद्यालयों का कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि युवाओं को प्रेरित करना, प्रशिक्षित करना और उन्हें उत्तरदायी नागरिक बनाना भी है।”

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को लोकतंत्र के इतिहास से अवगत कराना और उन्हें जागरूक नागरिक के रूप में तैयार करना था।

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