हर की पैड़ी से गूंजा ‘हर हर महादेव’, देशभर से पहुंचे शिवभक्त; प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम
श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही शिवभक्ति की सबसे विशाल यात्रा—कांवड़ यात्रा—का आज हरिद्वार से भव्य शुभारंभ हुआ। हर की पैड़ी से लेकर गोमुख और ऋषिकेश तक, गंगाजल लेने के लिए शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासनिक अनुमानों के मुताबिक इस वर्ष करीब 7 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार पहुंचेंगे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 4.5 करोड़ के करीब थी।
श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से चतुर्दशी तक चलने वाली यह यात्रा 10 दिन तक चलेगी, जिसका समापन 23 जुलाई, बुधवार को ‘शिव चौदस’ पर भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ होगा।
कांवड़ यात्रा: श्रद्धा, अनुशासन और अध्यात्म का पर्व
यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, संयम और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहते हैं, और कठिन तपस्या की भावना के साथ पदयात्रा करते हैं। यह यात्रा न केवल शरीर की बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी मानी जाती है।
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
कांवड़ यात्रा की जड़ें रामायण काल से जुड़ी मानी जाती हैं। श्रवण कुमार द्वारा अपने माता-पिता को गंगाजल से स्नान कराने की कथा को इसकी प्रारंभिक छवि माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार परशुराम, श्रीराम और रावण ने भी कांवड़ यात्रा कर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक किया था।
समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव द्वारा विषपान के बाद उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए रावण ने गंगाजल से अभिषेक किया, जिसे कांवड़ यात्रा की परंपरा की शुरुआत माना जाता है।
देशभर में कांवड़ यात्रा के प्रमुख केंद्र
- उत्तराखंड: हरिद्वार, गोमुख, ऋषिकेश
- बिहार: सुल्तानगंज से देवघर, पहलेजा घाट से मुजफ्फरपुर
- मध्य प्रदेश: इंदौर, देवास, शुजालपुर से उज्जैन
- झारखंड: देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम)
सभी राज्यों में प्रशासन द्वारा सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
हरिद्वार में प्रशासन की चाकचौबंद व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार शहर को 16 सुपर जोन, 38 जोन और 134 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। पूरे मेला क्षेत्र में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।
नगर निगम की ओर से पेयजल, पथ प्रकाश, मोबाइल शौचालय और सफाई की विशेष टीमें तैनात हैं। हर की पैड़ी, बैरागी कैंप, कांवड़ पटरी और कांवड़ बाजार में विशेष प्रबंध किए गए हैं।
भक्ति में रंगा हरिद्वार, गूंजे जयघोष
श्रावण मास के आरंभ के साथ ही हरिद्वार ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से भक्तिमय हो उठा है। यह धार्मिक उत्सव केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सहयोग और अनुशासन का भी संदेश देता है।



