उत्तराखंड भाजपा में महेंद्र भट्ट की एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां इसे संगठन में संतुलन का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक स्थिति को और मज़बूत करने वाला कदम बताया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री @pushkardhami जी ने श्री #MahendraBhatt जी के पुनः पदारुढ़ होने के अवसर पर कुछ अत्यधिक सारगर्भित बातें कही। उन्होंने कहा अफवाहों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाता, व्यक्ति को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा समय दिया जाता है। अफवाहें उड़ती हैं, मनगढ़ंत न्यूज़ चलाई… pic.twitter.com/DOKHZDZlHK
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) July 3, 2025
बीते कुछ समय से विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा आम रही कि क्या मुख्यमंत्री धामी की पकड़ कमजोर हो रही है। लेकिन महेंद्र भट्ट की अध्यक्ष के रूप में पुनर्वापसी ने इन सभी अटकलों को विराम दे दिया है।
हरीश रावत का तंज—“अंगूर अब और ऊपर पहुंच गया है”
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“सीएम धामी ने उन सभी की बोलती बंद कर दी है जो उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते थे। महेंद्र भट्ट को दोबारा अध्यक्ष बनाकर धामी ने दिखा दिया है कि बीजेपी में उनका कद पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है।”
हरीश रावत ने तंज भरे लहजे में कहा,
“जो लोग खुद को देवदार समझते हैं, उनके लिए अंगूर अब और ऊपर पहुंच गया है। जो मुख्यमंत्री हटाने के अभियान में लगे रहते हैं, उन्हें यह संदेश साफ़ मिल गया है।”
“2002 से उछल-कूद कर रहे हैं, अब कौन-सा यज्ञ करेंगे?”
अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज़ में रावत ने आगे कहा,
“कुछ आत्माएं तो 2002 से ही उछल-कूद मचा रही हैं, न जाने उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए कौन-सा यज्ञ करना पड़ेगा। लेकिन धामी ने साफ कर दिया है कि अब नेतृत्व में कोई भ्रम नहीं है।”
भाजपा की आंतरिक राजनीति में इस घटनाक्रम को संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के प्रति स्पष्टता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह संदेश भी साफ है कि पार्टी में मुख्यमंत्री धामी का प्रभाव बरकरार है।



