तीन बार समन के बाद भी उपस्थित न होने पर एसआईटी ने कड़ा रुख अपनाया, तलाश में जुटीं पुलिस टीमें
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच गहराते कानूनी विवाद में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बड़ा कदम उठाया है। जांच अधिकारी द्वारा तीन बार नोटिस दिए जाने के उपरांत भी बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी करवा लिया गया है। इस आदेश के बाद देहरादून पुलिस ने उनकी धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
समन की अनदेखी के बाद एसआईटी की सख्त कार्रवाई
एसआईटी प्रमुख जया बलूनी ने स्पष्ट किया कि गिरधारी लाल साहू को पूछताछ और बयान दर्ज कराने हेतु पुलिस की ओर से तीन बार नोटिस भेजा गया था। बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जब वह जांच टीम के समक्ष उपस्थित नहीं हुए, तो अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) प्राप्त किया गया। बलूनी ने बताया कि पुलिस टीमें उनकी तलाश कर रही हैं और जल्द ही गिरफ्तार कर उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह प्रकरण अक्टूबर 2026 में तब प्रकाश में आया, जब मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने घरेलू उत्पीड़न, धोखाधड़ी, मानसिक प्रताड़ना और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
रेखा आर्या का दावा था कि उन्हें एक ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई थी, जिसमें उनके पति एक अन्य महिला के साथ मिलकर उनकी तथा उनके बच्चों की हत्या की योजना बना रहे थे। इसके अलावा, मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि साहू ने वर्ष 2004 में उनसे अपनी पहली शादी और बच्चों की बात छिपाकर (अविवाहित बताकर) विवाह किया था। शिकायत में जाली हस्ताक्षरों से कंपनियों के निदेशक पदों से हटाने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने का जिक्र भी शामिल है।
आरोपों पर गिरधारी लाल साहू का रुख और हाईकोर्ट का आदेश
दूसरी तरफ, गिरधारी लाल साहू ने अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने तथा अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। साहू का कहना है कि उनकी शादी को 22 वर्ष हो चुके हैं और उनके बीच ऐसा विवाद नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने रेखा आर्या पर मंत्री पद के दौरान लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित अघोषित संपत्ति जुटाने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
नैनीताल हाईकोर्ट में मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई संपन्न हो चुकी है, जिसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। फिलहाल गैर-जमानती वारंट के आधार पर पुलिस की टीमें आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने और आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हैं।





