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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने डिजिटल क्रिएटर्स से अपील: संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को विश्व तक पहुँचाएँ

शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026 कार्यक्रम में पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं से संवाद किया

मुख्यमंत्री का आह्वान

देहरादून में आयोजित शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026 कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की कि वे उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं, खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य और अनछुए पर्यटन स्थलों को देश‑दुनिया तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुँच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता राज्य की सकारात्मक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का सशक्त माध्यम बन सकती है।

अनछुए पर्यटन स्थलों की पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार के अलावा मिलम, पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी जैसे कई क्षेत्र अभी तक व्यापक पहचान से वंचित हैं। एक प्रभावशाली वीडियो या रील किसी गाँव या स्थल को नई पहचान दिला सकती है, जिससे पर्यटन बढ़ेगा और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।

स्थानीय उत्पादों का नया बाजार

धामी ने महिलाओं के स्वयं‑सहायता समूहों, शिल्पकारों और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे स्थानीय शिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुएँ, पहाड़ी व्यंजन और एसएजी उत्पादों को अपने प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करें।

महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा

एक कंटेंट क्रिएटर ने नकल‑विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड से जुड़े निर्णयों पर सवाल उठाया। धामी ने स्पष्ट किया कि उनका दायित्व पूरे राज्य और जनता के प्रति है, और किसी भी निर्णय से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभाव को देखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के निर्माण में लगभग तीन लाख लोगों के विचार संकलित किए गए, जिससे महिलाओं के अधिकार और समानता को मजबूती मिली। नकल‑विरोधी कानून के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक से युवाओं का विश्वास प्रभावित होता था, और सरकार ने पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को मजबूत किया।

रिवर्स माइग्रेशन और रोजगार

धामी ने रिवर्स माइग्रेशन के सवाल पर कहा कि पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार के बढ़ते अवसरों से लोगों को अपने गाँव में रहकर आजीविका अर्जित करने की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने 44 प्रतिशत रिवर्स माइग्रेशन का आँकड़ा साझा किया और बताया कि होमस्टे, स्वयं‑सहायता समूह और सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। शीतकालीन पर्यटन सहित नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देकर पलायन की चुनौती को कम करने का लक्ष्य है।

वेडिंग डेस्टिनेशन पर जोर

उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने के लिए धामी ने त्रियुगीनारायण, मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर और मुक्तेश्वर जैसे स्थानों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। बेहतर होटल सुविधाएँ, सड़क संपर्क, हवाई सेवाएँ और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएँ वेडिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे राज्य के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक परिवेश को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रचारित करें।

फिल्म शूटिंग और फिल्म सिटी की संभावनाएँ

फिल्म जगत के कलाकारों ने उत्तराखंड में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएँ बढ़ाने का सुझाव दिया। धामी ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक विविधता, पर्वतीय दृश्य, नदियाँ, जंगल और पारंपरिक गाँव फिल्म निर्माण के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराते हैं।

बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन को नई गति

धामी ने बताया कि केवल प्रचार पर्याप्त नहीं है; बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएँ भी आवश्यक हैं। सड़क, हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार के साथ माणा, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है।

युवाओं के लिए संदेश

मुख्यमंत्री ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि और संघर्षों के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को आत्मनिर्भरता, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने योग, ध्यान, शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान के महत्व पर बल दिया।

कुंभ की तैयारी पर विशेष जोर

आगामी हरिद्वार कुंभ की तैयारियों के दौरान धामी ने बताया कि सरकार घाटों के विकास, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, आवागमन, सुरक्षा और स्वच्छता पर काम कर रही है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे कुंभ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से विश्व तक पहुँचाएँ।

डिजिटल पहचान का महत्व

धामी ने कहा कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और विकास की संभावनाओं को विस्तार देने का सशक्त माध्यम है। डिजिटल क्रिएटर्स अपनी रचनात्मकता से राज्य की संस्कृति, पर्यटन, स्थानीय उद्यमिता और विकास की कहानियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचा सकते हैं।

सम्मान और भविष्य की योजनाएँ

कार्यक्रम में पवनदीप राजन, सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी जैसे प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया गया। धामी ने उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

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