केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कार्यों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद के मुद्दों पर करारा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को रेखांकित किया और विपक्ष को निशाने पर लिया। शाह ने कहा कि चार दशकों से देश में तीन प्रमुख समस्याएं रही हैं – आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद।
उन्होंने इन मुद्दों के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की कड़ी नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है और मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। शाह ने दावा किया कि वह जिम्मेदारी के साथ यह कह सकते हैं कि नक्सलवाद 21 मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा, “मैं उन हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं को मजबूत करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।” शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो काला चश्मा पहनकर आंखें मूंदकर बैठे हैं, उन्हें विकास के दृश्य दिखाई नहीं दे सकते।
उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। शाह ने कहा कि पाकिस्तान से आतंकवादी कश्मीर में घुसते थे और यहां बम विस्फोट और हत्याएं करते थे। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई, और उरी व पुलवामा जैसे हमलों के बाद पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए जवाब दिया।
इसके अलावा, उन्होंने नक्सलवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद पर भी चर्चा की। शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक साल में 380 नक्सली मारे गए और 1194 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 1045 ने आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही, उन्होंने पूर्वोत्तर में शांति समझौतों और हथियार छोड़ने वाले युवाओं के बारे में भी बताया।
गृह मंत्री ने अंत में कहा कि गृह मंत्रालय कठिन परिस्थितियों में काम करता है और राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, अब यह अपराध अंतरराज्यीय और बहुराज्यीय हो गए हैं, जैसे कि नारकोटिक्स, साइबर अपराध, संगठित अपराध और हवाला।



