कैंची धाम में शिप्रा नदी ने धारण किया रौद्र रूप, जिले में अब तक चार लोगों की मौत
हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कैंची धाम में शिप्रा नदी रौद्र रूप में बह रही है, जिससे आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
नदियों का बढ़ा जलस्तर, प्रशासन अलर्ट पर
भारी बारिश के बाद जिले की प्रमुख नदियां उफान पर हैं। हल्द्वानी में गौला नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वहीं, रामनगर में कोसी और दाबका नदियां भी तेज बहाव के साथ बह रही हैं। पदमपुरी क्षेत्र में बहने वाली कालसा नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल के स्नो व्यू में सबसे अधिक 217 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा हल्द्वानी-काठगोदाम में 166 मिलीमीटर, मुक्तेश्वर और चोरगलिया में 107.7 मिलीमीटर, कैंची धाम में 105 मिलीमीटर और खनस्यू में 92.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
हादसों में जान-माल का नुकसान
आपदा नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश और आपदा से जुड़े हादसों में अब तक जिले में चार लोगों की जान जा चुकी है। बीते 1 सितंबर को भीमताल क्षेत्र में एक बच्ची नाले के तेज बहाव में बह गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा जिले में दो पशुओं की भी मौत हुई है।
आवासीय भवनों की बात करें तो 54 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि एक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया है। तीन गौशालाओं को भी नुकसान पहुंचा है। नैनीताल तहसील के अल्चौना-पांडेछोर इलाके में ककड़िया नाले में मलबा आने से कई घर प्रभावित हुए हैं, जिसके बाद 20 परिवारों को उनके मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।
यातायात बुरी तरह प्रभावित, 40 से अधिक मार्ग बंद
लगातार हो रहे भूस्खलन और मलबे के कारण जिले में यातायात सेवा ठप हो गई है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, वर्तमान में तीन राज्य मार्ग, दो मुख्य जिला मार्ग, एक अन्य जिला मार्ग और 41 ग्रामीण रास्ते पूरी तरह बंद हैं। लोनवि और संबंधित विभागों की टीमें जेसीबी मशीनों के जरिए सड़कों को खोलने के काम में जुटी हुई हैं।
राहत की बात यह है कि फिलहाल जिले में बिजली और पानी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें।





