चंपावत बनेगा कीवी उत्पादन का हब: 125 बगीचे तैयार

उत्तराखंड के जनपद चंपावत को 2027 तक कीवी हब बनाने की दिशा में उद्यान विभाग ने सक्रिय कदम उठाना शुरू कर दिया है। इस मिशन के तहत जिले में 19 हेक्टेयर क्षेत्र में 125 कीवी बगीचे स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे कीवी उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का लक्ष्य है।

स्वरोजगार के नए अवसर

कीवी मिशन का मुख्य उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस योजना के तहत प्लांटेशन का कार्य क्लस्टर स्तर पर किया जा रहा है, ताकि कीवी की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। कीवी के पौधे की कीमत 275 रुपये है, लेकिन युवाओं और काश्तकारों को 80 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है, जिससे उन्हें केवल 20 प्रतिशत लागत खुद उठानी होगी।

वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन

विभाग ने पिछले तीन वर्षों में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विशेष रूप से प्रेरित किया है। सर्दियों में आमतौर पर कीवी के पौधे रोपे जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में तीन हेक्टेयर, 2023-24 में छह हेक्टेयर और 2024-25 में 10 हेक्टेयर में कीवी की खेती की गई है।

जिले के लोहाघाट, बाराकोट, पाटी और चंपावत में कीवी उत्पादन के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। काश्तकारों को कीवी की खेती के लिए 12 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल रही है, जिसमें 9.60 लाख रुपये सब्सिडी के रूप में और 2.40 लाख रुपये काश्तकारों की ओर से खुद देने होंगे। योजना के तहत कीवी बगीचों में ट्रोलिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।

युवाओं का बढ़ता रुझान

जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय ने बताया कि चंपावत में कीवी उत्पादन की दिशा में युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में 19 हेक्टेयर भूमि पर कीवी की खेती हो रही है, और 2027 तक चंपावत जिला कीवी हब के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की योजना है। मुख्यमंत्री ने भी क्लस्टर बेस पर कीवी बागानों की स्थापना पर जोर दिया है।

 

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