अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सरकार व शिकायतकर्ता से मांगा जवाब।
नैनीताल। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को नैनीताल उच्च न्यायालय से तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी है। पुलिस कार्रवाई व गिरफ्तारी से बचने तथा अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त कराने के उद्देश्य से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष को आगामी 3 नवंबर तक अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। गिरधारी लाल साहू ने याचिका दाखिल कर कहा है कि उनके विरुद्ध दर्ज कराई गई शिकायत पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत है। उनका कहना है कि उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत झूठे आरोपों में घसीटा जा रहा है। इसलिए जब तक अदालत अंतिम फैसला नहीं लेती, तब तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए और देहरादून के कैंट थाने में दर्ज प्राथमिकी को खारिज किया जाए।
विवाह और धोखाधड़ी के दावों का किया खंडन
अपनी याचिका में गिरधारी लाल साहू ने स्पष्ट किया है कि उनका विवाह वर्ष 2004 में रेखा आर्या के साथ हुआ था और दोनों पिछले 22 वर्षों से दांपत्य जीवन में हैं। इतने लंबे समय बाद इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है।
उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि शादी के समय गिरधारी लाल ने खुद के अविवाहित होने का झूठा दावा किया था, जबकि वह पूर्व से शादीशुदा थे। इसके अतिरिक्त, उन पर रेखा आर्या के जाली दस्तखत करके कंपनियों के निदेशक पद से हटाने, जान से मारने की धमकियां देने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, गिरधारी लाल साहू ने इन समस्त दावों को पूरी तरह खारिज किया है।
210 करोड़ रुपये की संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप
अदालत की शरण में पहुंचे गिरधारी लाल साहू ने अपनी मंत्री पत्नी पर पलटवार करते हुए बेहद गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी लगाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि मंत्री पद पर रहते हुए रेखा आर्या ने कथित रूप से 210 करोड़ रुपये की बेनामी और अवैध संपत्ति एकत्र की है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। साहू का कहना है कि उन्होंने पत्नी को इस कथित भ्रष्टाचार से बाज आने को कहा था, जिससे नाराज होकर उनके विरुद्ध झूठी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोशल मीडिया ऑडियो-वीडियो से शुरू हुआ था विवाद
दोनों के बीच यह पारिवारिक और कानूनी जंग तब सार्वजनिक हुई जब मंत्री रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा की, जिसमें साहू की किसी अन्य महिला से बातचीत का दावा किया गया था। इसके बाद उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर पति पर कई संगीन आरोप मढ़े और देहरादून के कैंट थाने में औपचारिक शिकायत दी। शिकायत में अपनी व अपने बच्चे की सुरक्षा का खतरा जताते हुए पहली शादी छिपाने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की और साहू की तलाश में टीमें भेजीं।
मुकदमा कायम होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी पलटवार करते हुए वीडियो जारी कर 210 करोड़ के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। अब हाईकोर्ट द्वारा राहत न दिए जाने और 3 नवंबर की तारीख तय किए जाने के बाद सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।





