चमोली के वांण गांव की ग्राम प्रधान की शिकायत पर डीएम ने आयोजन समिति को चेताया, समिति ने लगाए अवरोध पैदा करने के आरोप
थराली: सिद्धपीठ कुरूड़ से मां नंदा देवी की तीन डोलियों के कैलाश यात्रा पर रवाना होने के बाद भी बड़ी जात यात्रा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार विवाद यात्रा मार्ग के अंतिम गांव वांण से जुड़ा है। श्रद्धालुओं के गांव पहुंचने से उत्पन्न होने वाली कानून व्यवस्था और संभावित अव्यवस्था की आशंका को लेकर ग्राम प्रधान की शिकायत पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। वहीं दूसरी ओर, आयोजन समिति ने इसे यात्रा में रोड़ा अटकाने की कोशिश बताया है।
ग्राम प्रधान की शिकायत पर डीएम की चेतावनी
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में वांण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी द्वारा दी गई शिकायत का हवाला दिया गया है।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की डोली के साथ अन्य डोलियों और भारी संख्या में श्रद्धालुओं के वांण पहुंचने से गांव में शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है और अव्यवस्था फैल सकती है। चमोली डीएम ने समिति के अध्यक्ष को ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था प्रभावित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आयोजन समिति ने लगाया साजिश का आरोप
डीएम के पत्र के जवाब में आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने तीन पन्नों का विस्तृत जवाब भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा को जानबूझकर बाधित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि गौड़ पुजारियों का एक धड़ा, जो राजजात समिति नौटी से भी संबद्ध है, इस यात्रा में अड़चनें पैदा कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
कर्नल रावत ने स्पष्ट किया कि बड़ी जात का आयोजन कई महीने पहले सिद्धपीठ कुरूड़ के पुजारियों, डोली और मंदिर समिति की सहमति के बाद ही तय किया गया था। समिति की तरफ से प्रशासन, राजजात समिति और अन्य पक्षों के साथ लगातार तालमेल बिठाने की कोशिशें की गई हैं।
लाटू देवता मंदिर की आस्था और सुरक्षा का सवाल
समिति अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि वांण गांव में नंदा देवी के धर्मभाई लाटू देवता का ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर स्थित है। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। ऐसे में श्रद्धालुओं के वांण गांव में प्रवेश पर रोक या आपत्ति जताना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
समिति का तर्क है कि यात्रा मार्ग पर कानून व्यवस्था बनाए रखने और तीर्थयात्रियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुख्य दायित्व शासन और प्रशासन का है। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि वह समय रहते यात्रा मार्ग के अत्यंत दुर्गम और निर्जन पड़ावों पर सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करे।





