प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों का खाका पेश किया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश की आर्थिक प्रगति का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि किस तरह बीते 12 वर्षों में भारत आर्थिक संकट वाले ‘फ्रेजाइल फाइव’ देशों की सूची से बाहर निकलकर दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसके साथ ही उन्होंने भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति बनाने के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’ का एक नया आर्थिक रोडमैप भी देश के सामने रखा।
‘फ्रेजाइल फाइव’ से मजबूत अर्थव्यवस्था का सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब वैश्विक वित्तीय संस्थाओं ने भारत को दुनिया की पांच सबसे नाजुक अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में शामिल किया था। इस समूह में भारत के साथ ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये जैसे देश शामिल थे। लेकिन पिछले 12 वर्षों के कड़े प्रयासों के बाद भारत ने इस छवि को पूरी तरह बदल दिया है और आज देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प के बल पर देश अब एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्या है ‘शक्ति की सप्त धारा’ विकास मॉडल?
देश के आगामी विकास की गति को तेज करने के लिए प्रधानमंत्री ने सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की घोषणा की, जिसे उन्होंने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का नाम दिया। इसके तहत निम्नलिखित सात क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी:
- मैन्युफैक्चरिंग: प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय केंद्र बनना होगा। इसके लिए भारतीय उद्योगों को लागत (कॉस्ट), गुणवत्ता (क्वालिटी) और उत्पादन के पैमाने (स्केल) पर वैश्विक स्तर पर खरा उतरना होगा।
- एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग: भारत को केवल कृषि उत्पादों की पैदावार तक सीमित रहने के बजाय, फूड प्रोसेसिंग के जरिए वैश्विक बाजार में अपने ब्रांड स्थापित करने होंगे।
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: देश की डिजिटल और संचार तकनीक को मजबूत करने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर विशेष जोर दिया गया। पीएम ने बताया कि देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट में काम शुरू हो चुका है और निर्यात भी हो रहा है। अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित होने की उम्मीद है।
- गति शक्ति: इसके तहत आने वाले समय में देश भर में बिना किसी बाधा के तेज कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
- रक्षा शक्ति: भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अगली पीढ़ी की तकनीकों जैसे ड्रोन और सुपरसोनिक तकनीक के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी: पर्यावरण अनुकूल और स्वच्छ ऊर्जा के लिए ग्रीन इकोनॉमी तथा समुद्री संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए ब्लू इकोनॉमी को देश के विकास का नया इंजन बनाया जाएगा।
- भारत की सॉफ्ट पावर: योग, आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थ, पर्यटन और रचनात्मक संसाधनों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देकर रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ाना इस धारा का मुख्य लक्ष्य है।
वैश्विक सप्लाई चेन में अग्रणी बनने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी साख मजबूत करना है। टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स और मशीनरी जैसे विविध क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए देश को अपनी क्षमताओं का निरंतर विस्तार करना होगा।



