कंप्यूटर खरीद से खेल किट तक होगी पड़ताल, शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग में निर्माण कार्यों, कंप्यूटर खरीद, खेल सामग्री की खरीद और मिड-डे मील जैसी विभिन्न योजनाओं में संभावित अनियमितताओं की आशंका के बीच विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने और जांच कराने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी योजना में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार विभागीय समीक्षा बैठकों के दौरान कई योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद मुख्यालय स्तर पर कुछ मामलों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। सबसे अधिक ध्यान विद्यालयों के लिए कंप्यूटर खरीद प्रक्रिया पर केंद्रित किया गया है, जहां निविदा प्रक्रिया और लागत को लेकर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।

विभाग के संज्ञान में यह भी आया है कि विद्यालयों के लिए खरीदी गई खेल सामग्री और ‘जादू का पिटारा’ जैसी शैक्षणिक किटों की खरीद प्रक्रिया में भी कई बिंदुओं की जांच आवश्यक है। प्रारंभिक स्तर पर यह आशंका व्यक्त की गई है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धी दरें सामने नहीं आईं और अधिकांश खरीद विभाग द्वारा निर्धारित अधिकतम मूल्य पर ही की गई। ऐसे में यह जांच की जाएगी कि क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के अनुरूप संपन्न हुई थी।

इसी प्रकार राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित मिड-डे मील योजना की भी समीक्षा की जाएगी। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या और भोजन की खपत के आंकड़ों में अंतर की शिकायतें सामने आई हैं। विभाग अब इन मामलों का मिलान कर यह पता लगाएगा कि कहीं खाद्यान्न की मात्रा और विद्यार्थियों की संख्या के बीच कोई विसंगति तो नहीं है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि विभाग शिक्षा से जुड़ी प्रत्येक योजना की नियमित निगरानी करेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण कार्यों की निगरानी को मजबूत करने के लिए विभाग मुख्यालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी करेगा। यह अधिकारी प्रदेशभर में विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग करेगा और जिला स्तरीय समितियों तथा अधिकारियों के साथ सीधे समन्वय स्थापित कर कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करेगा।

शिक्षा विभाग का मानना है कि निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

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