देहरादून। अयोध्या राम मंदिर में कथित दान राशि चोरी के मामले की चर्चाओं के बीच अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम से जुड़ा एक कथित वित्तीय अनियमितता का मामला भी सुर्खियों में आ गया है। हिंदूवादी संगठन भैरव सेना ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के एक कर्मचारी पर आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, निलंबन और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आरोप सामने आने के बाद बीकेटीसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री द्वारा बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि बदरीनाथ धाम में एक निर्धारित अवधि के दौरान मंदिर समिति के एक कर्मचारी द्वारा आर्थिक गड़बड़ी की गई। संगठन का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।
संगठन ने मांग की है कि संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। साथ ही संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जाए। भैरव सेना ने यह भी मांग की है कि यदि प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाते हैं तो स्थानीय पुलिस में उचित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भैरव सेना ने अपने पत्र में कहा है कि देशभर के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर श्रद्धालुओं की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो वह जनआंदोलन और विरोध-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने पर विचार करेगा।
उधर, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि उन्हें संबंधित शिकायत और पत्र की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि समिति इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ समिति अधिनियम और सेवा नियमों के तहत कड़ी विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो बिना तथ्यों के मंदिर समिति की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी को कुछ समाचारों में उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है। संबंधित व्यक्ति मंदिर समिति का नियमित कर्मचारी है और पूर्व में भी कई अध्यक्षों के साथ सहायक के रूप में कार्य कर चुका है।
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन रांगड़ ने बताया कि मामले में संबंधित कर्मचारी और उस समय ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन में कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा विस्तृत जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि जांच समिति उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के तहत दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर भैरव सेना अपने आरोपों पर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कराई जाएगी। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई होती है।