जनहित याचिका के नाम पर सस्ती राजनीति अब अदालतों की नजर में आ गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बॉबी पंवार द्वारा दायर की गई जनहित याचिका (PIL) को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह याचिका “जनहित नहीं, बल्कि पब्लिसिटी के लिए दायर की गई है।”
बॉबी पंवार, जिनका नाम सुनते ही हाल के वर्षों में आंदोलन, विवाद और राजनीतिक स्टंट याद आने लगते हैं, इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर हाईकोर्ट पहुंचे थे। लेकिन अदालत ने न सिर्फ उनकी याचिका खारिज की, बल्कि उनकी मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले ही राज्य सरकार द्वारा जांच के बाद बंद किया जा चुका है। यदि पंवार को कोई आपत्ति थी, तो उन्हें ट्रायल कोर्ट में जाना चाहिए था, न कि सीधे उच्च न्यायालय में। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका में जनहित जैसी कोई मंशा नहीं दिखती।
बॉबी पंवार पर पहले भी युवाओं को उकसाकर आंदोलन कराने, संस्थाओं पर झूठे आरोप लगाने और दबाव बनाने जैसे आरोप लगते रहे हैं। इस याचिका के माध्यम से भी उन्होंने सीधे हाईकोर्ट का सहारा लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आने की कोशिश की, जिसे अदालत ने पूरी तरह से नकार दिया।
अब यह सवाल उठ रहा है – क्या बॉबी पंवार को न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, या फिर यह सब जानबूझकर किया गया पब्लिसिटी ड्रामा था? हाईकोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि अदालतें अब ऐसे राजनीतिक स्टंट को बर्दाश्त नहीं करेंगी।



