देहरादून: राजधानी देहरादून में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, व्यवस्थित और यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप बनाने को लेकर सम्भागीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। आयुक्त गढ़वाल मंडल एवं RTA अध्यक्ष आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में परिवहन व्यवस्था से जुड़े कुल 53 विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में स्कूल बसों की सुरक्षा, ई-टिकटिंग, ई-रिक्शा और ई-ऑटो के संचालन, ऑटो परमिट, यात्री सुविधाओं और सड़क सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में सबसे अहम फैसला स्कूल परिवहन वाहनों की सुरक्षा को लेकर लिया गया। अब स्कूल के नाम पंजीकृत बसों, स्कूल वैन समेत सभी स्कूल परिवहन वाहनों में GPS और CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्कूल वाहनों का हर साल इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी कराना होगा।
स्कूल वाहनों में GPS और CCTV अनिवार्य
RTA ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल परिवहन वाहनों को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। स्कूल के नाम से पंजीकृत बसों, स्कूल वैन और अन्य सभी स्कूल परिवहन वाहनों में GPS और CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है।
GPS के जरिए वाहन की लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी, जबकि CCTV से वाहन के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। इससे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्कूल परिवहन संचालन में पारदर्शिता लाने में भी मदद मिलेगी।
हर साल होगा स्कूल वाहनों का इलेक्ट्रिकल ऑडिट
RTA के निर्णय के अनुसार सभी स्कूल परिवहन वाहनों का प्रत्येक वर्ष अधिकृत शोरूम से इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराया जाएगा। ऑडिट के बाद मिलने वाली रिपोर्ट को वाहन में सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों में इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और आग जैसी घटनाओं के जोखिम को कम करना है। संबंधित वाहन संचालकों को ऑडिट रिपोर्ट सुरक्षित रखनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर इसकी जांच की जा सके।
ड्राइवर और कंडक्टर का हर साल स्वास्थ्य परीक्षण
स्कूल बसों के चालकों और परिचालकों की सेहत को लेकर भी RTA ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब स्कूल बसों के चालक और परिचालक का प्रत्येक वर्ष स्वास्थ्य परीक्षण कराना अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य परीक्षण का रिकॉर्ड भी बस में सुरक्षित रखना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को लेकर चलने वाले वाहनों का संचालन करने वाले चालक और परिचालक स्वास्थ्य की दृष्टि से फिट रहें।
छह महीने बाद ई-टिकटिंग होगी अनिवार्य
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ई-टिकटिंग मशीन को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया गया है।
पहले चरण में बड़ी स्टेज कैरिज बसों में ई-टिकटिंग मशीन का परीक्षण किया जाएगा। इसमें टीजीएमओ, विश्वनाथ सेवा, यातायात सेवा और सिटी बसों को शामिल किया गया है।
RTA के अनुसार परीक्षण के बाद करीब छह महीने की अवधि में व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ई-टिकटिंग मशीन को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया गया है।
ई-रिक्शा और ई-ऑटो के लिए चार शहरों में संयुक्त सर्वे
देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और रुड़की में ई-रिक्शा और ई-ऑटो के संचालन को लेकर संयुक्त सर्वे कराया जाएगा। सर्वे का मुख्य उद्देश्य ऐसे स्थानों की पहचान करना है, जहां ई-रिक्शा और ई-ऑटो की वजह से सबसे ज्यादा यातायात दबाव या कंजेशन की स्थिति बनती है।
सर्वे के बाद आवश्यक सुझाव RTA के माध्यम से STA को भेजे जाएंगे। इसके आधार पर आगे की व्यवस्था को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
ओवरलोडिंग और नाबालिगों की ड्राइविंग पर सख्ती
RTA अध्यक्ष ने ई-रिक्शा और ई-ऑटो में ओवरलोडिंग, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और नशे की हालत में ड्राइविंग के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
RTO प्रवर्तन को ऐसे मामलों में अभियान चलाकर कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
देहरादून के ऑटो को जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक संचालन की अनुमति
देहरादून केंद्र के ऑटो परमिट में 40 किलोमीटर तक संचालन की अनुमति देने का आवेदन किया गया था। इसका उद्देश्य देहरादून के ऑटो को जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और जॉलीग्रांट अस्पताल तक जाने की सुविधा देना था।
RTA ने यातायात दबाव और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सामान्य 40 किलोमीटर की सीमा के बजाय जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और जॉलीग्रांट अस्पताल तक संचालन की अनुमति देने का फैसला लिया है।
इस फैसले से देहरादून से एयरपोर्ट और जॉलीग्रांट अस्पताल जाने वाले यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।
हरिद्वार और रुड़की में ऑटो-विक्रम परमिट होंगे जारी
हरिद्वार और रुड़की में ऑटो और विक्रम परमिट से जुड़े मामलों पर भी बैठक में विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि आवेदन प्राप्त होने पर नियमानुसार परमिट जारी किए जाएंगे।
वहीं, ऋषिकेश में ऑटो परमिट जारी करने से पहले संयुक्त सर्वे कराया जाएगा। सर्वे के बाद इसकी रिपोर्ट के आधार पर अगली RTA बैठक में परमिट को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
टाटा मैजिक के रूट विस्तार पर पुलिस से मांगी रिपोर्ट
टाटा मैजिक के रूट विस्तार से जुड़े मामले में भी बैठक में चर्चा हुई। इस संबंध में पुलिस के साथ समन्वय कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
टाटा मैजिक से जुड़े अन्य मामलों में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद आगे की कार्रवाई और निर्णय लिया जाएगा।
यात्री सुविधाओं और सड़क सुरक्षा पर भी जोर
बैठक में केवल परमिट और संचालन से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
यात्री सुविधाओं, सड़क सुरक्षा मानकों, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा परमिट, मार्ग परिवर्तन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
RTA अध्यक्ष आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा और यात्री सुविधाओं में लगातार सुधार करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णयों और अनुमोदित प्रस्तावों के संबंध में विस्तृत आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।
बच्चों की सुरक्षा से लेकर डिजिटल परिवहन तक बड़े फैसले
RTA की इस बैठक में लिए गए फैसलों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर स्कूल वाहनों में GPS और CCTV की अनिवार्यता, हर साल इलेक्ट्रिकल ऑडिट और चालक-परिचालक के स्वास्थ्य परीक्षण से बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
वहीं ई-टिकटिंग के परीक्षण, ई-रिक्शा और ई-ऑटो के संचालन का संयुक्त सर्वे, परमिट व्यवस्था में सुधार और सड़क सुरक्षा पर सख्ती के फैसलों से सार्वजनिक परिवहन को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।