डबल इंजन से भी नहीं मिला उत्तराखंड को फायदा, उत्तर प्रदेश में अटके हजारों करोड़

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार होने के बावजूद परिसंपत्तियों और देनदारी का सालों पुराना विवाद अब भी जस का तस बना हुआ है.

देहरादून: राजनीतिक रूप से भाजपा उत्तराखंड में ट्रिपल इंजन की सरकार का दावा करती रही है, लेकिन पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ केंद्र में भी भाजपा की ही सरकार होने के बावजूद उत्तराखंड को अब तक परिसंपत्तियों पर इंसाफ नहीं मिल पाया है. स्थिति यह है कि कर्मचारियों की पेंशनर्स से जुड़ी रकम और उसके ब्याज पर भी कोई फैसला नहीं हुआ है. जबकि बाकी दूसरे कई विभाग भी उत्तर प्रदेश से पैसा वापस मिलने की राह तक रहे हैं.

अब उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों को लेकर विवाद को धनराशि के रूप में देखे तो उत्तराखंड वन विकास निगम उत्तर प्रदेश वन विकास निगम से 77 करोड़ रुपए के 20 सालों के ब्याज की मांग अब भी कर रहा है. इसके लिए उत्तर प्रदेश वन विकास निगम को प्रस्ताव भेजने की बात शासन स्तर पर चर्चा में रखी गई है. इसी तरह सिंचाई विभाग के अंतर्गत परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों पर भी लगातार राज्य सरकार उत्तर प्रदेश के साथ वार्ता कर रहा है. लेकिन इस मामले में भी अभी कई मामलों में विवाद की स्थिति बनी हुई है. जिसमें उत्तराखंड सरकार अपने स्तर पर पक्ष रखती रही है.

लगातार उत्तर प्रदेश से इन मामलों में चर्चा की जा रही है और उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों को लेकर चले आ रहे इस विवाद को जल्द खत्म किया जा सकेगा. इसके बाद राज्य को अपना पैसा मिल पाएगा.

-सुबोध उनियाल कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड-

ऊर्जा विभाग के स्तर पर देखा जाए तो यहां भी कुछ मामले THDC से जुड़े हुए हैं. जिसमें उत्तर प्रदेश के स्तर पर पूर्व में प्रोजेक्ट के लिए लगाई गई धनराशि और उसके बाद इस पर हुई कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है. कुल मिलाकर पुनर्गठन विभाग को इस पर रिपोर्ट तैयार करनी है, ताकि अलग-अलग विभागों की विभिन्न परिसंपत्तियों से जुड़ी मांगों और विषयों को उत्तर प्रदेश सरकार के सामने रखा जा सके. सबसे खास बात तो पेंशनर्स से जुड़ी है.

भाजपा की उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और केंद्र में भी सरकार है लेकिन कोई भी सरकार उत्तराखंड के हक में काम नहीं कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उत्तराखंड को न्याय देने का काम नहीं किया है और ना ही केंद्र सरकार इस पर किसी तरह का सकारात्मक हस्तक्षेप कर रही है. धामी सरकार ने भी अपने स्तर पर कोई गंभीर प्रयास नहीं किए हैं और इसीलिए राज्य के लिए अनुकूल परिस्थितियों होने के बाद भी कोई हल नहीं निकल पा रहा है.

-हरक सिंह रावत, पूर्व मंत्री-

जिसमें वित्त विभाग साल 2021-22 और 22 – 23 में उत्तर प्रदेश राज्य पर 2261 करोड़ की देयता होने की बात कहता रहा है. जिसका उत्तर प्रदेश द्वारा अब तक भुगतान नहीं किया गया है. बड़ी बात ये है कि ये रकम पेंशन मद से जुड़ी है. इसके अलावा सिविल डिपॉजिट मद में भी 440 करोड़ की देयता बाकी बताई गई है. जिसके लिए अब प्रस्ताव भेजने की तैयारी हो रही है.

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