जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को जर्जर और असुरक्षित इमारतों के चिन्हीकरण के लिए दिए निर्देश
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक वर्चुअल बैठक के दौरान अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में असुरक्षित भवनों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया कि किसी भी भवन को बिना पुख्ता तकनीकी जांच के जर्जर या गिरासू घोषित न किया जाए। जनसुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों, नगर निगम और नगर पालिका परिषदों को जल्द से जल्द सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
तकनीकी जांच के बिना न लें कोई फैसला
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि किसी भी भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए उसके संरचनात्मक और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच होनी चाहिए। बिना तकनीकी रिपोर्ट के कोई भी निर्णय न लिया जाए, ताकि अनावश्यक कार्रवाई से बचा जा सके और जनसुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
सर्वेक्षण के दौरान भवन की वर्तमान स्थिति, उसकी संरचनात्मक मजबूती और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का बारीकी से परीक्षण करने को कहा गया है।
विशेषज्ञ तकनीकी टीमों का होगा गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने नगर निगम, नगर पालिका परिषद, लोक निर्माण विभाग (PWD) और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) को निर्देश दिए हैं कि वे तकनीकी निरीक्षण के लिए विशेषज्ञ टीमों का गठन करें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी इमारत को गिरासू घोषित करने की कार्रवाई में तकनीकी और कानूनी, दोनों ही पहलुओं का पूरी तरह से पालन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाने पर बल दिया ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना या जनहानि को रोका जा सके।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुई इस बैठक में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार और संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद मुख्य रूप से शामिल थे।


