उत्तराखंड के अमर बलिदानियों के पैतृक गांवों में स्थापित होंगी प्रतिमाएं, रामपुर तिराहा में ई-लाइब्रेरी और संग्रहालय का होगा विस्तार
मुजफ्फरनगर/देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अमर बलिदानियों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने वहां सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास किया। इसके निर्माण के लिए ₹27 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य आंदोलन के जिन शहीदों की मूर्तियां अब तक नहीं लग पाई हैं, उन्हें उनके पैतृक गांव या निवास क्षेत्र के उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा रामपुर तिराहा शहीद स्थल परिसर के विकास, राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी में बदलने और संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणाएं की गईं।
सात शहीदों के स्मारक स्थल का शिलान्यास
रामपुर तिराहा कांड में अपने प्राण न्योछावर करने वाले सात आंदोलनकारियों—राजेश नेगी, गिरीश भद्री, सत्येंद्र सिंह चौहान, रविंद्र रावत चौहान, अशोक कुमार, राजेश लखेरा और सूर्य प्रकाश थपलियाल के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास किया गया। सीएम ने शहीद स्मारक के लिए जमीन देने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान का विशेष रूप से स्मरण किया और बताया कि परिसर में उनकी प्रतिमा भी लगाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात दिल्ली जाते समय आंदोलनकारियों के साथ हुई इस घटना को राज्य निर्माण के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू में दिए गए बलिदानों के बल पर ही उत्तराखंड का गठन संभव हो सका।
आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के लिए कल्याणकारी कदम
राज्य आंदोलनकारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि सरकार उनके और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है और इसके तहत नियुक्तियां भी दी गई हैं। आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए इसे तहसील स्तर पर स्थानांतरित किया गया है।
इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन किया गया है। राज्य की सड़कों और स्कूलों के नाम अमर बलिदानियों के नाम पर रखने के आदेश जारी हो चुके हैं। परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा और राज्य के आयोजनों में सम्मानपूर्वक आमंत्रण भी सुनिश्चित किया गया है।
संग्रहालय विस्तार और स्थानीय योगदान का स्मरण
रामपुर तिराहा स्थित संग्रहालय में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों की मदद और शरण देने वाले स्थानीय निवासियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने आंदोलन में महिलाओं और मातृशक्ति के संघर्ष की भी सराहना की।
श्रद्धांजलि सभा में उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, एमएलसी वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मुजफ्फरनगर भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी, उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर समेत कई गणमान्य लोग और आंदोलनकारी उपस्थित रहे।



