फैसला आने से पहले ही जीत का दावा करने वाले मंत्री गणेश जोशी के मामले में जज ने फैसला सुनाने से किया इनकार
नैनीताल: उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की मुश्किलें आय से अधिक संपत्ति के मामले में बढ़ती नजर आ रही हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट का आधिकारिक फैसला सार्वजनिक होने से पहले ही अपने पक्ष में परिणाम आने का दावा करना कैबिनेट मंत्री को भारी पड़ गया है।
सुरक्षित फैसला सुनाने से कोर्ट का इनकार
इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने पूर्व में सुरक्षित रखे गए अपने फैसले को जारी करने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने इस मामले को अब दूसरी पीठ को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि 8 सितंबर 2026 को मामले पर बहस पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों की वजह से इस पीठ द्वारा फैसला सुनाना अब उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को इस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (CRLR/344/2025) को नई पीठ के गठन हेतु मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
फैसले से पहले ही मंत्री ने किया था दावा
दरअसल, नैनीताल हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित होने के बाद, 11 सितंबर को कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इस दौरान उन्होंने बयान दिया था कि उनके खिलाफ कोर्ट में विचाराधीन याचिका खारिज हो गई है। फैसले के आधिकारिक रूप से आने से पहले ही जीत का दावा करने की वजह से अब इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के जरिए दूसरी पीठ को रेफर कर दिया गया है। नई पीठ के गठन के बाद ही अब इस पर आगे की सुनवाई होगी।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि देहरादून निवासी विकेश नेगी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगाते हुए नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इससे पहले साल 2025 में देहरादून की विशेष न्यायाधीश विजिलेंस/अपर जिला जज की अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।



