निठारी कांड के आरोपी ने हरिद्वार में छिपाई थी पहचान, बैग से मिले दो अलग-अलग आधार कार्ड
देशभर में चर्चित रहे निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर जीवन बिताया। कोली ने रोशनाबाद की दीपगंगा सोसायटी में ‘सदाराम’ नाम से करीब 15 दिनों तक नाइट वॉचमैन (चौकीदार) के तौर पर काम किया था।
चाय की दुकान से कमाई की थी आस
जांच में सामने आया है कि दिल्ली के नरेला निवासी धर्मेंद्र कौशिक की सहायता से कोली ने सप्तसरोवर क्षेत्र में एक चाय की दुकान शुरू की थी। कुंभ मेले के दौरान होने वाली भीड़ से अच्छी कमाई की उम्मीद में वह इस दुकान को चला रहा था।
धर्मेंद्र कौशिक ने सिडकुल के ठेकेदार जय कश्यप से कोली की बातचीत कराई थी, जिनका परिचय एक महिला अधिवक्ता ने करवाया था। पुलिस जांच के अनुसार, पूर्व जेल विजिटर अनिल शर्मा ने सात हजार रुपये प्रति माह के किराये पर दुकान उपलब्ध कराई थी, जिसके लिए उन्हें 14 हजार रुपये सिक्योरिटी मनी भी दी गई थी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा था कोली
सूत्रों के अनुसार, कोली गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। यहां तक कि अपने बच्चे के जन्मदिन पर उपहार दिलाने के लिए भी उसके पास पैसे नहीं थे। किसी व्यक्ति से फोन पर हुई बहस के बाद वह काफी परेशान चल रहा था। धर्मेंद्र कौशिक ने बुधवार शाम कोली से आखिरी मुलाकात की थी और उसे ढाई हजार रुपये की मदद भी दी थी।
बैग से मिले दो आधार कार्ड
पुलिस को कोली के बैग की तलाशी के दौरान दो अलग-अलग पहचान पत्र (आधार कार्ड) मिले हैं। पहले कार्ड में उसका नाम ‘सदाराम’ पुत्र शंकर, निवासी अल्मोड़ा दर्ज है। वहीं, दूसरे आधार कार्ड पर उसका असली नाम ‘सुरेंद्र कोली’ पुत्र शंकर, निवासी नोएडा सेक्टर-31 लिखा हुआ है।
हरिद्वार में कोली ने सभी को अपना नाम सदाराम ही बताया था। उससे जुड़े लोगों का कहना है कि वे उसके असली नाम और अतीत से अनजान थे। कोली के डायबिटीज से पीड़ित होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और मामले से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।



