उत्तराखंड में 100 ट्रैक रूट्स की होगी GPS/GIS मैपिंग, सीएम धामी ने सर्वे दल को दिखाई हरी झंडी

एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए देश में पहली बार हो रही है इस तरह की मैपिंग, तैयार होगा विशेष नेविगेशन ऐप

देहरादून: उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 100 प्रमुख ट्रेक और हाइक रूट्स की वैज्ञानिक तरीके से GPS/GIS मैपिंग और तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा। इस विशेष अभियान के लिए शुक्रवार को तकनीकी दल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कैंप कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा सरकार की प्राथमिकता: सीएम धामी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक और ट्रेकिंग पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य के प्रसिद्ध ट्रेकिंग स्थलों के साथ-साथ दूरस्थ और कम लोकप्रिय रूट्स को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वैज्ञानिक मैपिंग के बाद ट्रेकर्स को रूट्स के बारे में सटीक जानकारियां मिल सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जा सकेगा। साथ ही, सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को होमस्टे और गाइड के रूप में काम मिल सकेगा।

बिना इंटरनेट के भी काम करेगा विशेष नेविगेशन ऐप

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश के इन 100 ट्रैक रूट्स की मैपिंग के बाद एक विशेष नेविगेशन ऐप भी विकसित किया जाएगा। यह ऐप ऑफलाइन मोड में भी काम करेगा, जिससे ट्रेकर्स मोबाइल नेटवर्क न होने पर भी सही रास्ता ढूंढ सकेंगे। अगर कोई ट्रेकर अपने मार्ग से भटकता है, तो यह ऐप अलर्ट जारी करेगा। देश में इस तरह का पहला प्रयास किया जा रहा है, जिससे लगभग 5 से 10 हजार किलोमीटर लंबे रूट्स का पूरा डेटाबेस तैयार हो जाएगा।

एक साल में पूरा होगा सर्वे का काम

सर्वेक्षण के लिए रवाना हुई टीम पहले चरण में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ट्रेक रूट्स की मैपिंग करेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए टीम को एक साल का समय दिया गया है। जैसे-जैसे रूट्स की मैपिंग होती जाएगी, वैसे-वैसे नेविगेशन ऐप को अपडेट कर ट्रेकर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही एक ‘कॉफी टेबल बुक’ भी तैयार होगी, जिसमें ट्रैकिंग रूट्स के आसपास पड़ने वाले गांवों और वहां रुकने के ठिकानों (होमस्टे) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी।

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