विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर बढ़ा उत्तराखण्ड, चारधाम के साथ अन्य मंदिरों में भी बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था

जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना, धारी देवी में दोगुना तथा पूर्णागिरि धाम में डेढ़ गुना बढ़े श्रद्धालु; चारधाम यात्रा भी बना रही नए रिकॉर्ड


देहरादून। उत्तराखण्ड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास, सड़क संपर्क मजबूत करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य के तहत चारधाम के साथ अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन, पर्यटन सर्किट के विस्तार और तीर्थस्थलों पर आधुनिक सुविधाओं के विकास के कारण प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है।

प्रमुख मंदिरों में रिकॉर्ड बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में 1,74,119 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 67,875 थी। इसी प्रकार रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 3,40,385 पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक है।

श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर में इस वर्ष 5,42,626 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 2,83,275 थी। वहीं चंपावत के पूर्णागिरि धाम में भी लगभग 20.91 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब डेढ़ गुना अधिक है।

चारधाम यात्रा बना रही नए कीर्तिमान

इस वर्ष चारधाम यात्रा ने भी नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। यात्रा के 105 दिनों में 45.84 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम में यात्रा के पहले 100 दिनों में 15.52 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.11 लाख अधिक हैं।

यमुनोत्री धाम में टूटा पुराना रिकॉर्ड

कठिन पैदल यात्रा के बावजूद यमुनोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया इतिहास रच दिया है। 2 अगस्त तक यहां 6.54 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है।

आदि कैलाश और कैंची धाम में भी बढ़ी आस्था

पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश में इस वर्ष मात्र दो महीनों में 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

वहीं नैनीताल के कैंची धाम में भी आस्था का सैलाब उमड़ा है। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां 24.34 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें अकेले जून महीने में 8.66 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन किए।

सरकार का लक्ष्य—आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों का विकास, तीर्थस्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और बेहतर संपर्क मार्गों का निर्माण प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से उत्तराखण्ड धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित करेगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Latest Articles

spot_img
posjp33 posjp33 posjp33